जापान के ग्रामीण इलाकों में घटती आबादी और बुजुर्ग होते किसानों के बीच अब रोबोट खेती का सहारा बन रहे हैं। यामागाता प्रांत के निशिकावा कस्बे में किसानों की औसत उम्र 73 वर्ष है और पर्याप्त मजदूर नहीं हैं। यहां रोबोट चेरी के फूल तोड़ने, पैक करने और भालुओं को खेतों से दूर रखने जैसे काम कर रहे हैं। देश के ग्रामीण इलाकों से युवाओं का पलायन लगातार बढ़ा है। इसके अलावा जन्मदर 2025 में रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई और आबादी 2060 तक 10 करोड़ से कम होने का अनुमान है। ऐसे में रोबोट ग्रामीण जापान की खेती और आजीविका बचाने की उम्मीद बनते जा रहे हैं। नौकरी के लिए जापानी सीख रहे भारतीय युवा देश में कामगारों की भारी कमी को पूरा करने के लिए जापानी सरकार अब विदेशी लोगों को बुला रही है। इसका असर भारत के नॉर्थ-ईस्ट तक दिख रहा है। मिजोरम, मणिपुर और असम के युवा जापानी भाषा सीख रहे हैं और स्किल टेस्ट दे रहे हैं। साथ ही केयरगिविंग व एग्रीकल्चर जैसी नौकरियों के लिए जापान जाने की तैयारी कर रहे हैं। असम सरकार ट्रेनिंग फीस पर सब्सिडी और रिलोकेशन सपोर्ट दे रही है। वहीं, मणिपुर और मिजोरम की यूनिवर्सिटी में भी जापानी भाषा सिखाने के लिए सेंटर शुरू किए गए हैं। टेक्नोलॉजी से समस्या का हल यामागाता प्रांत में, स्थानीय अधिकारियों ने जनसंख्या में गिरावट से निपटने के लिए रोबोट से जुड़े कई समाधानों को आजमाया है। निशिकावा प्रांत के 48 महापौर दाइशी कानो ने स्मार्ट कृषि के लिए करीब 38 लाख रुपए जुटाए। उन्होंने भी मजदूरों की समस्या हल करने के लिए टेक्नोलॉजी का उपयोग करने का फैसला किया है।
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