भारत ने चीन का मुकाबला करने की क्या योजना बनाई
भारत ने दक्षिणी पूर्वी एशियाई देशों की अर्थव्यवस्था को साथ लेकर चलने के मकसद से एक्ट ईस्ट पॉलिसी को लॉन्च किया था। इसके अलावा वियतनाम, दक्षिण कोरिया, जापान, फिलीपींस, इंडोनेशिया, थाइलैंड और सिंगापुर जैसे देशों के साथ अहम सैन्य अड्डे और रणनीतिक समझौतों को अंजाम दिया गया है ताकि चीन को जवाब दिया जा सके। भारत ने म्यांमार के साथ नौसैनिक साझेदारी शुरू की है। इसके तहत म्यांमार की नौसेना को इंडियन नेवी की तरफ से ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि क्षेत्र में भारत की मौजूदगी बढ़ सके। भारत म्यांमार के सिटवे पोर्ट पर अपना व्यापारिक-बंदरगाह तैयार करने लगा है। देश के सबसे दूरस्थ राज्य, मिजोरम को कोलकता से जोड़ने के लिए वर्ष 2008 में भारत ने म्यांमार के साथ कालाडान प्रोजेक्ट के लिए करार किया। ये बंदरगाह कालडन नदी के जरिए भारत के मिजोरम से जुड़ जायेगा ताकि वहां से कार्गो-जहाज आवागमन कर सके। पाकिस्तान के ग्वादर में पोर्ट बना रहा है तो भारत भी ईरान के चाहबर-पोर्ट बनाने में जुट गया है। चाबहार बंदरगाह ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत के मध्य में स्थित है। यहां पर भारत के पश्चिमी तट से आसानी से पहुंचा जा सकता है। मालदीव पोर्ट के पास ही यहां पर मिलिट्री रडार लगा दिया। जिसकी वजह से यहां पानी के जहाज, नौसेना के जहाज जितनी भी गतिविधियां होती हैं उस पर नजर रखी जा सकती है। मालदीव सेशेल्स और ओमान में भी भारतीय नौसेना सक्रिय हो रही है. सिंगापुर के साथ साल 2017 में एक कॉन्ट्रैक्ट साइन किया गया था।
भारत का नेकलेस ऑफ डायमंड
भारत ने अपनी समुद्री सुरक्षा रणनीति के लिए मोजाबिंक चैनल समेत दक्षिण पश्चिम हिंद महासागर, चीन के भारी निवेश वाले पूर्वी अफ्रीकी तट को बेहद अहम मानता है। विश्लेषकों का मानना है कि ये अभ्यास हिंद महासागर में पूर्वी अफ्रीकी देशों और द्वीपीय देशों के साथ रक्षा संबंधों को मजबूत करने के प्रयासों का हिस्सा है। पिछले कुछ सालों में हिंद महासागर भारत और चीन के बीच टकराव का नया केंद्र बनता जा रहा है। भारत ने चीन की स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स की नीति को मात देने के लिए नेकलेस ऑफ डायमंड नीति को मजबूत करना शुरू कर दिया है।
क्या है पूरी स्ट्रैटर्जी?
भारत ने हाल के दिनों में चीन को काउंटर करने के लिए गुपचुप तरीके से कई कदम उठाए हैं। जिसमें प्रधानमंत्री की विदेश यात्रा का काफी रोल रहा है। भारत की ये योजना जमीनी स्तर पर तेजी के साथ आगे बढ़ रही है। जिसका सीधा उदाहरण मॉरीशस में गुप्त तरीके से बन रहा भारत का मिलिट्री बेस है। मॉरीशस के अगलेगा द्वीप पर भारत के गुप्त सैन्य अड्डे की चर्चा फिर से शुरू हो गई है। इस आईलैंड की नई सैटेलाइट इमेज जारी हुई है जिससे पता चलता है कि भारतीय नौसेना के P-8I सबमरीन हंटिंग विमान को रखने के लिए आईलैंड पर हैंगर का निर्माण, नए बने रनवे के बगल में हो रहा है। पाकिस्तान के ग्वादर एयरोप्ट पर चीन की मौजूदगी को काउंटर करने के लिए भारत ने ओमान में एक बेस सेट-अप किया है। डैकम पोर्ट से भारत का महत्वपूर्ण क्रूड ऑयल ट्रेड होता है। इसके अलावा ये पोर्ट अरेबियन सी और गल्फ ईडन दोनों पर ही अपनी नजर रखता है। जो ओमान के साथ भारत के अच्छे रिश्तों की वजह से संभव हो पाया है। भारत इंडोनेशिया के साथ सबांग बंदरगाह प्रोजेक्ट पर कार्य कर रहा है। अफ्रीका में जिबूती, पश्चिम एशिया में ओमान के टुकम बंदरगाह पर सैन्य गतिविधि के लिए भारत को अनुमति प्राप्त है। चीन के पड़ोसी देशों में जापान, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया के साथ भारत के सैन्य समझौते हैं। जिसके अंतर्गत भारतीय नौसेना को इन देशों के बंदरगाहों पर तेल भरवाने मरम्मत करवाने और हथियार जुटाकर आगे बढ़ने का अधिकार है।
इसे भी पढ़ें: China 99-Year Trap | जानिए कैसे Chinese Territory बन गए श्रीलंका के 2 बड़े पोर्ट ?| Teh Tak Part 1
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.