क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला इनकम टैक्स क्रेडिट (Input Tax Credit) ITC से जुड़ा था। GST व्यवस्था में कंपनियां कारोबार के दौरान खरीदे गए योग्य सामान और सेवाओं पर चुकाए गए टैक्स का क्रेडिट लेकर अपनी बिक्री पर बनने वाली GST देनदारी को कम कर सकती हैं। टैक्स अधिकारियों का आरोप था कि टाटा स्टील (Tata Steel) ने वित्त वर्ष 2018-19 से 2020-21 के बीच करीब ₹890.52 करोड़ का ITC गलत तरीके से क्लेम किया था। इसी आधार पर विभाग ने टैक्स की वसूली के साथ ब्याज और बराबर राशि की पेनल्टी लगाने की मांग की थी।
टाटा स्टील (Tata Steel) ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा था कि उसने अतिरिक्त या गलत ITC क्लेम नहीं किया। कंपनी का तर्क था कि संबंधित टैक्स क्रेडिट एक वित्त वर्ष से जुड़ा था, लेकिन उसे अगले वित्त वर्ष में क्लेम किया गया और GST नियमों के तहत ऐसा करना अनुमत था। कंपनी ने टैक्स कार्रवाई के अधिकार क्षेत्र और समय-सीमा से जुड़े मुद्दे भी उठाए थे।
₹890.52 करोड़ की मांग को बरकरार
दिसंबर 2025 में टैक्स अथॉरिटी ने कंपनी के खिलाफ ₹890.52 करोड़ की मांग को बरकरार रखा और उतनी ही राशि की पेनल्टी भी लगाई। इसके बाद टाटा स्टील (Tata Steel) ने फरवरी 2026 में झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया। अप्रैल में हाईकोर्ट ने मामले को अपीलीय प्राधिकरण के सामने ले जाने का रास्ता दिया, जिसके बाद कंपनी सुप्रीम कोर्ट पहुंची। सुप्रीम कोर्ट ने मई में मामले में नोटिस जारी कर आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई। 19 अगस्त को सुनवाई हुई और 25 अगस्त को फैसला सुनाया गया।
निवेशक ध्यान रखें ये बात
हालांकि, निवेशकों को एक बात ध्यान में रखनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट का फैसला मौजूदा टैक्स डिमांड और पेनल्टी को खत्म करता है, लेकिन विवाद को हर तरह से हमेशा के लिए समाप्त नहीं करता। कोर्ट ने टैक्स विभाग को CGST Act की सेक्शन 74 के तहत उचित शर्तों का पालन करते हुए नई कार्यवाही शुरू करने की सीमित अनुमति दी है। ऐसी किसी नई कार्यवाही में आदेश 28 फरवरी 2027 तक पारित किया जाना होगा। फिलहाल Tata Steel के लिए यह फैसला बड़ी राहत है, क्योंकि कंपनी पर लगी मौजूदा ₹890.52 करोड़ की GST डिमांड और बराबर की पेनल्टी रद्द हो चुकी है।
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