कंपनी ने क्यों लिया है यह फैसला
कंपनी ने आईओसीसी का दर्जा हासिल करने के लिए पहले भी प्रयास किए हैं। मई में स्विगी अपने संचालन के नियमों (एओए) में बदलाव के लिए जरूरी शेयरधारकों की मंजूरी हासिल नहीं कर पाई थी। इन बदलावों के जरिये कंपनी आईओसीसी का दर्जा प्राप्त करना चाहती थी।
आउटफ्लो का डर
इस एक फैसले की वजह से MSCI स्टैंडर्ड इंडेक्स में स्विगी 340 मिलियन डॉलर का पैसिव आउटफ्लो देख सकता है। जोकि 125 मिलियन शेयर के बराबर है। सीएनबीसीटीवी 18 की रिपोर्ट के अनुसार एमएससीआई के अलावा FTSE इंडेक्स में 120 मिलियन डॉलर का आउटफ्लो देखा जा सकता है। जोकि 46 मिलियन शेयरों के बराबर है।
52 वीक लो लेवल के करीब पहुंचा शेयर
आज शुक्रवार को बीएसई में स्विगी का शेयर 260 रुपये के लेवल पर खुला था। दिन में कंपनी का शेयर 7 प्रतिशत से अधिक की गिरावट के बाद 242.60 रुपये के इंट्रा-डे लो लेवल पर आ गया था। कंपनी का 52 वीक लो लेवल 235.85 रुपये और 52 वीक हाई 473 रुपये है। स्विगी का मार्केट कैप 68386 करोड़ रुपये का है।
स्विगी शेयर बाजार में लगातार संघर्ष ही कर रहा है। बीते 3 महीने के दौरान कंपनी के शेयरों की कीमतों में 13 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है। 1 साल में इस कंपनी के शेयरों का दाम 40 प्रतिशत गिरा है। जोकि सेंसेक्स इंडेक्स के करीब 8 प्रतिशत की तुलना में कई गुना अधिक है।
गुरुवार को क्या-क्या हुआ फैसला
स्विगी के निदेशक मंडल ने विदेशी स्वामित्व सीमा के प्रस्ताव के अलावा भारत के विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून (फेमा) के अनुरूप एओए में बदलाव को भी मंजूरी दी है। साथ ही अधिकृत वरीयता शेयर पूंजी को अधिकृत इक्विटी शेयर पूंजी में बदलने का प्रस्ताव भी मंजूर किया गया है, जिसे शेयरधारकों की मंजूरी की जरूरत होगी।
(भाषा के इनपुट के साथ)
(यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश से पहले एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें।)
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