गर्मियों में स्किन टैनिंग एक कॉमन प्रॉब्लम है। ज्यादा सन लाइट एक्सपोजर में UV (अल्ट्रावायलेट) रेज से स्किन टैन हो सकती है। मामूली दिखने वाली टैनिंग कई बार मेलानोमा जैसे स्किन कैंसर का रिस्क बढ़ा सकती है। ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ (WHO) के मुताबिक, दुनियाभर में मेलानोमा (स्किन कैंसर) के करीब 3.32 लाख मामलों में से लगभग 83% UV रेडिएशन की वजह से होते हैं। यानी हर 10 में से 8 से ज्यादा केस सनलाइट एक्सपोजर और टैनिंग से जुड़े हैं। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. विजय सिंघल, सीनियर कंसल्टेंट, डर्मेटोलॉजी, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली सवाल- टैनिंग क्या होती है? जवाब- टैनिंग स्किन का एक नेचुरल डिफेंस मैकेनिज्म है। यह सूरज की UV रेज के संपर्क में आने पर होता है। जब स्किन पर UV किरणें पड़ती हैं, तो शरीर मेलानिन नामक पिगमेंट का प्रोडक्शन बढ़ा देता है। यही मेलानिन स्किन को डार्क (सांवला) बना देता है। इसे टैनिंग कहते हैं। सवाल- गर्मियों में टैनिंग ज्यादा क्यों होती है? जवाब- गर्मियों में सनलाइट में UV किरणों की इंटेंसिटी बढ़ जाती है। इससे टैनिंग का रिस्क बढ़ जाता है। यह स्किन को जल्दी टैन करती हैं। पसीने और हल्के कपड़ों की वजह से स्किन ज्यादा एक्सपोज रहती है। सवाल- UV-A और UV-B किरणों में क्या अंतर है? इनमें से किस रेज के कारण टैनिंग होती है? जवाब- टैनिंग UV-B किरणों की वजह से होती है। ये स्किन को डैमेज करती हैं और इनकी मौजूदगी में बॉडी बचाव के लिए ज्यादा मेलानिन बनाती है। हालांकि, UV-A के एक्सपोजर से भी टैनिंग हो सकती है। इसके कारण स्किन में पहले से मौजूद मेलानिन डार्क हो जाता है। इसे ‘इमीडिएट टैनिंग’ कहते हैं। दोनों के बीच अंतर समझिए- UV-A किरणें: UV-B किरणें: सवाल- मेलानिन क्या है और यह टैनिंग को कैसे बढ़ाता है? जवाब- ये स्किन, बाल और आंखों का रंग तय करने वाला एक नेचुरल पिगमेंट है। यह स्किन की सेल्स (मेलानोसाइट्स) में बनता है। यह टैनिंग को कैसे बढ़ाता है? सवाल- क्या बार-बार टैनिंग होने से स्किन एजिंग बढ़ती है? जवाब- हां, यह स्किन एजिंग बढ़ा सकती है। सवाल- किन लोगों को टैनिंग जल्दी होती है? जवाब- कुछ लोगों को टैनिंग का रिस्क ज्यादा होता है। ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या हॉर्मोनल बदलाव (जैसे प्रेग्नेंसी) से टैनिंग बढ़ती है? जवाब- हां, प्रेग्नेंसी के दौरान टैनिंग और स्किन डार्क हो सकती है। सवाल- क्या सिर्फ धूप में जाने से टैनिंग होती है या इनडोर भी हो सकती है? जवाब- धूप में जाने से टैनिंग जल्दी होती है, लेकिन घर के अंदर भी यूवी रेज एक्सपोजर से टैनिंग हो सकती है। हालांकि इसका असर कम होता है। सवाल- क्या मोबाइल/लैपटॉप स्क्रीन का भी स्किन पर कोई असर होता है? जवाब- हां, मोबाइल और लैपटॉप स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट स्किन पर कुछ हद तक असर डाल सकती है। हालांकि ये असर सूरज की UV किरणों जितना तेज नहीं होता। सवाल- टैनिंग से बचने के लिए क्या करें? जवाब- टैनिंग से बचने के लिए सनस्क्रीन लगाएं और धूप से बचें। सभी सेफ्टी टिप्स ग्राफिक में देखिए- सवाल- टैनिंग हटाने के घरेलू उपाय क्या हैं? जवाब- टैनिंग होने पर कुछ घरेलू उपाय अपनाए जा सकते हैं। ग्राफिक में देखिए- ध्यान रखें सवाल- टैनिंग होने पर कब डर्मेटोलॉजिस्ट के पास जाना चाहिए? जवाब- कई बार टैनिंग हाइपरपिगमेंटेशन, एलर्जी या स्किन डिसऑर्डर का संकेत भी हो सकता है। ऐसे में कुछ स्थितियों में डर्मेटोलॉजिस्ट को दिखाना जरूरी होता है। जैसे- सवाल- कौन-से फूड्स स्किन को सन डैमेज से बचाते हैं? जवाब- कुछ फूड्स सनलाइट प्रोटेक्शन को सपोर्ट करते हैं। ग्राफिक में देखिए- सन टैनिंग से जुड़े कुछ कॉमन सवाल और जवाब सवाल- क्या पानी की कमी से टैनिंग बढ़ती है? जवाब- सीधे तौर पर पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) टैनिंग का कारण नहीं बनती, लेकिन यह टैनिंग का असर बढ़ा सकती है। सवाल- क्या टैनिंग और पिगमेंटेशन एक ही चीज है? जवाब- नहीं, टैनिंग और पिगमेंटेशन एक जैसी नहीं हैं। हालांकि दोनों में स्किन का कलर डार्क होता है। टैनिंग पिगमेंटेशन सवाल- क्या टैनिंग से स्किन कैंसर का रिस्क बढ़ता है? जवाब- हां, टैनिंग स्किन पर UV किरणों से हुए डैमेज का संकेत है। बार-बार या लंबे समय तक ऐसा होने से स्किन कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है। सवाल- क्या मेकअप करने से टैनिंग नहीं होती? जवाब- नहीं, सिर्फ मेकअप करने से टैनिंग नहीं रुकती। मेकअप प्रोडक्ट्स स्किन पर एक लेयर जरूर बनाते हैं, लेकिन वे UV किरणों को पूरी तरह ब्लॉक नहीं करते। सवाल- टैनिंग कब किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकती है? जवाब- अगर टैनिंग सामान्य तरीके से ठीक न हो, तेजी से बढ़े या उसके साथ दूसरे लक्षण दिखें तो यह सिर्फ टैनिंग नहीं बल्कि किसी समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसे मामलों में खुद से इलाज करने के बजाय डर्मेटोलॉजिस्ट से कंसल्ट करना जरूरी है। …………………………….. ये खबर भी पढ़ें… जरूरत की खबर- गर्मियों में स्किन इन्फेक्शन:धूप, उमस और पसीने से बढ़ता स्किन रैश, डर्मेटोलॉजिस्ट से जानें बचाव के 10 टिप्स देश के कई हिस्सों में तापमान 45°C से ऊपर पहुंच गया है। चिलचिलाती धूप, उमस और ज्यादा पसीने से स्किन इन्फेक्शन का रिस्क बढ़ जाता है। हाई टेम्परेचर और ह्यूमिडिटी बैक्टीरिया व फंगस के पनपने के लिए अनुकूल माहौल बनाते हैं। इससे दाद, खुजली और रैशेज जैसी समस्याएं बढ़ती हैं। ऐसे में जरूरी है कि समय रहते लक्षणों को पहचानकर बचाव के सही उपाय किए जाएं। पूरी खबर पढ़ें…
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