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हाल ही में दिल्ली के हौज खास इलाके में पूर्व IAS अधिकारी धनेंद्र कुमार के घर में AC ब्लास्ट के बाद भीषण आग लग गई। इस हादसे में उनकी मौत हो गई। इससे पहले दिल्ली के विवेक विहार में AC में आग लगने से 9 लोगों की जान गई थी। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर एसी में आग क्यों लगती है।
दरअसल एसी की मेंटेनेंस और सेफ्टी को नजरअंदाज करने से ओवरहीटिंग और शॉर्ट सर्किट का रिस्क बढ़ता है, जो कई बार हादसे का कारण बनता है।
हालांकि, सही जानकारी और थोड़ी सावधानी से हम अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं। साथ ही एसी की लाइफ भी बढ़ा सकते हैं।
इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में आज एसी ब्लास्ट की असल वजह समझेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- घर में एसी लगवाते समय किन बातों का ध्यान रखें?
- एसी ब्लास्ट से बचने के लिए क्या सावधानियां बरतनी जरूरी हैं?
एक्सपर्ट: अभिषेक मिश्र, इलेक्ट्रिकल इंजीनियर, नागपुर, महाराष्ट्र
सवाल- एसी में ब्लास्ट क्यों होता है?
जवाब- आमतौर पर एसी में ब्लास्ट अचानक नहीं होता। यह कई छोटी-छोटी लापरवाहियों का नतीजा होता है। जब एसी पर जरूरत से ज्यादा लोड पड़ता है या पार्ट्स ठीक से काम नहीं करते तो ओवरहीटिंग और शॉर्ट सर्किट की स्थिति बन जाती है, जो ब्लास्ट का कारण बनती है। नीचे ग्राफिक में एसी ब्लास्ट के सभी कारण देखिए-

सवाल- क्या ब्लास्ट सिर्फ पुराने एसी में होता है या नए में भी रिस्क हो सकता है?
जवाब- पुराने एसी के पार्ट्स घिस गए होते हैं। ऐसे में सर्विसिंग और मेंटेनेंस का ध्यान न रखने पर रिस्क बढ़ जाता है। वहीं नए एसी में गलत इंस्टॉलेशन, सस्ती वायरिंग और ओवरलोडिंग की वजह से हादसे का जोखिम हो सकता है।
सवाल- गर्मी बढ़ने पर ब्लास्ट के केस क्यों बढ़ जाते हैं?
जवाब- कई ऐसे कारण हैं, जो एसी में ओवरहीटिंग और शॉर्ट सर्किट का कारण बनते हैं।
- गर्मी में लोग अक्सर लगातार लो टेम्परेचर पर एसी चलाते हैं, जिससे उसके कंपोनेंट्स पर लोड बढ़ता है।
- बाहर का तापमान ज्यादा होने पर कंप्रेसर और मोटर ओवरहीट हो जाते हैं। इससे सिस्टम ओवरलोड हो जाता है।
- एसी में इस्तेमाल होने वाली रेफ्रिजरेंट गैस (जैसे R-32) तापमान बढ़ने पर फैलती है।
- अगर कूलिंग सिस्टम ठीक से काम न करे या गैस का दबाव असामान्य रूप से बढ़ जाए, तो एसी के अंदर प्रेशर बढ़ सकता है। इससे खराबी या हादसे का जोखिम बढ़ता है।
- गर्मियों में एसी घंटों बिना रुके चलता है। इससे पार्ट्स को कूल होने का मौका नहीं मिलता और फेल होने का रिस्क बढ़ता है।
- आउटडोर यूनिट बंद या गर्म जगह पर लगी हो तो हीट बाहर नहीं निकल पाती, जिससे ओवरहीटिंग बढ़ती है।
- गर्मी में बिजली की खपत ज्यादा होती है। इससे वोल्टेज ऊपर-नीचे होता है और शॉर्ट सर्किट/स्पार्किंग का रिस्क बढ़ जाता है।
सवाल- एसी यूज और मेंटेनेंस में क्या गलतियां नहीं करनी चाहिए?
जवाब- एसी इस्तेमाल करते समय छोटी-छोटी लापरवाहियां बड़े खतरे में बदल सकती हैं। इसलिए इन गलतियों से बचना जरूरी है-
एसी यूज के दौरान न करें ये गलतियां
- गलती-1 लगातार बिना ब्रेक के एसी चलाना।
क्या होता है- इससे कंप्रेसर पर दबाव बढ़ता है और ओवरहीटिंग होती है।
- गलती-2 बहुत कम तापमान (16–18°C) पर चलाना।
क्या होता है- मशीन पर अनावश्यक लोड बढ़ता है, बिजली भी ज्यादा खर्च होती है।
- गलती-3 दरवाजे-खिड़कियां खुली रखना।
क्या होता है- कूलिंग के लिए एसी पर ज्यादा लोड पड़ता है।
- गलती-4 बार-बार ऑन-ऑफ करना।
क्या होता है- कंप्रेसर पर झटका पड़ता है, जल्दी खराब हो सकता है।
मेंटेनेंस से जुड़ी गलतियां
- गलती-1 समय पर सर्विस न कराना।
क्या होता है- गंदे फिल्टर और जाम कॉइल्स ओवरहीटिंग बढ़ाते हैं।
- गलती-2 लोकल/अनट्रेंड टेक्नीशियन से काम कराना।
क्या होता है- छोटी सी गलती या फिटिंग से प्रेशर असंतुलित हो सकता है।
- गलती-3 खराब या सस्ती वायरिंग का इस्तेमाल।
क्या होता है- शॉर्ट सर्किट और स्पार्किंग का रिस्क बढ़ता है।
- गलती-4 आउटडोर यूनिट बंद जगह पर लगाना।
क्या होता है- हीट बाहर नहीं निकल पाती, सिस्टम ओवरलोड हो जाता है।
- गलती-5 गैस लीक या अजीब आवाज नजरअंदाज करना।
क्या होता है- छोटी समस्या बड़ी दुर्घटना में बदल सकती है।
इन गलतियों से बचकर एसी की लाइफ बढ़ाई जा सकती है और हादसों का रिस्क भी कम किया जा सकता है।
सवाल- अगर घर में एसी है तो वायरिंग से जुड़ी क्या गलतियां नहीं होनी चाहिए?
जवाब- एसी की सेफ्टी काफी हद तक सही वायरिंग पर निर्भर करती है। इसलिए इन गलतियों से बचना जरूरी है-
मजबूत वायरिंग
- पतली/लोकल क्वालिटी की वायर का इस्तेमाल न करें।
- एसी के लिए अलग हैवी-ड्यूटी लाइन रखें।
- ढीले कनेक्शन या कटे-फटे वायर तुरंत बदलें।
स्टेबलाइजर
- एसी की क्षमता के अनुसार सही रेटिंग वाला स्टेबलाइजर लगाएं।
- सस्ता/लोकल स्टेबलाइजर इस्तेमाल न करें।
- अगर स्टेबलाइजर बार-बार ट्रिप (सुरक्षा कारणों से अपने आप बंद) हो रहा है, तो इसे नजरअंदाज न करें।
- स्टेबलाइजर को हवादार जगह पर रखें।
- समय-समय पर सर्विस/चेक कराएं।
अर्थिंग
- सही और मजबूत अर्थिंग कनेक्शन होना जरूरी है।
- पुराने या जंग लगे अर्थिंग वायर को बदलें।
- अर्थिंग को समय-समय पर चेक कराएं।
- बिना अर्थिंग के एसी बिल्कुल न चलाएं।
वोल्टेज फ्लक्चुएशन
- बार-बार लाइट आए-जाए तो एसी तुरंत बंद करें।
- हाई/लो वोल्टेज को नजरअंदाज न करें।
- पीक टाइम (शाम) में जरूरत से ज्यादा लोड न डालें।
- लंबे समय तक फ्लक्चुएशन हो तो इलेक्ट्रिशियन से जांच कराएं।
सेफ्टी डिवाइस
- एसी के लिए अलग MCB जरूर लगवाएं।
- ELCB (अर्थ लीकेज सर्किट ब्रेकर)/RCCB (रेसिडुअल करंट सर्किट ब्रेकर) लगाएं।
- इससे लीकेज करंट से सुरक्षा होती है।
- बार-बार ट्रिप होने पर कारण पता करें, बायपास न करें।
- समय-समय पर इन डिवाइस की टेस्टिंग करते रहें।
सवाल- एसी ब्लास्ट से बचने के लिए क्या सावधानियां बरतनी जरूरी हैं?
जवाब- एसी ब्लास्ट से बचाव के लिए सही इस्तेमाल और समय पर मेंटेनेंस जरूरी है। थोड़ी-सी सावधानी बड़े खतरे को टाल सकती है। सभी सेफ्टी टिप्स ग्राफिक में देखिए-

सवाल- अगर एसी से आवाज/स्मेल आए या स्पार्क दिखे तो क्या करें?
जवाब- ऐसे संकेत खतरे की चेतावनी होते हैं। इन्हें बिल्कुल नजरअंदाज न करें। सभी संकेत और एक्शन ग्राफिक में देखिए-

सवाल- घर में एसी लगवाते समय किन बातों का ध्यान रखें?
जवाब- एसी के सही चुनाव और इंस्टॉलेशन से उसकी सेफ्टी और परफॉर्मेंस तय होती है। इसके लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखें-
- हमेशा ISI मार्क और ब्रांडेड एसी खरीदें।
- कमरे के साइज के हिसाब से सही टन क्षमता चुनें।
- इंस्टॉलेशन हमेशा प्रोफेशनल से कराएं।
- एसी के लिए अलग पावर लाइन रखें।
- सही साइज की वायरिंग और प्लग इस्तेमाल करें।
- MCB/ELCB जैसे सेफ्टी डिवाइस लगवाएं।
- आउटडोर यूनिट हवादार जगह पर लगाएं।
- ड्रेनेज पाइप सही ढंग से फिट कराएं।
- वोल्टेज फ्लक्चुएशन वाले एरिया में स्टेबलाइजर लगाएं।
- इंस्टॉलेशन के बाद टेस्ट रन जरूर कराएं।

एसी से जुड़े कुछ सवाल और जवाब
सवाल- क्या पुराने एसी में ब्लास्ट का रिस्क ज्यादा होता है?
जवाब- हां, अगर रेगुलर सर्विसिंग न हो तो गैस लीक या कंप्रेसर ओवरहीटिंग की समस्या बढ़ती है। इससे शॉर्ट सर्किट या ब्लास्ट जैसी स्थिति बन सकती है।
सवाल- क्या इनवर्टर एसी सेफ होते हैं?
जवाब- इनवर्टर एसी सामान्य एसी की तुलना में ज्यादा सेफ माने जाते हैं, क्योंकि इनमें लोड के हिसाब से कंप्रेसर चलता है। इससे ओवरलोडिंग और ओवरहीटिंग की संभावना कम होती है, लेकिन सही इंस्टॉलेशन और सर्विसिंग जरूरी है।
सवाल- एसी की सर्विसिंग कितने दिनों में करानी चाहिए?
जवाब- हर 6 महीने में कम-से-कम एक बार सर्विसिंग करानी चाहिए। अगर एसी ज्यादा चलाते हैं तो 3-4 महीने में टेक्नीशियन को दिखाना बेहतर है। इससे कूलिंग, सेफ्टी और लाइफ तीनों बेहतर रहती हैं।
सवाल- क्या 24 घंटे एसी चलाना सुरक्षित है?
जवाब- लगातार एसी चलाने से कंप्रेसर पर दबाव बढ़ता है, जिससे ओवरहीटिंग और खराबी का रिस्क बढ़ता है। इसलिए बीच-बीच में ब्रेक देना बेहतर है। अगर लंबे समय तक चलाना है तो टेम्परेचर 24 से 26 डिग्री सेल्सियस तक रखें।
सवाल- क्या स्टेबलाइजर लगाने से एसी ब्लास्ट का खतरा कम होता है?
जवाब- हां, स्टेबलाइजर वोल्टेज फ्लक्चुएशन को कंट्रोल करता है। इससे इलेक्ट्रिकल सर्किट और कंप्रेसर सुरक्षित रहते हैं और शॉर्ट सर्किट या डैमेज का खतरा कम होता है।
सवाल- क्या गलत इंस्टॉलेशन भी एसी ब्लास्ट का कारण बन सकता है?
जवाब- बिल्कुल, गलत वायरिंग, ढीले कनेक्शन, खराब ड्रेनेज या गलत गैस चार्जिंग से एसी में प्रेशर बढ़ सकता है। इससे लीकेज, स्पार्क या ब्लास्ट जैसी घटनाएं हो सकती हैं।
सवाल- क्या खराब वेंटिलेशन से खतरा बढ़ता है?
जवाब- हां, आउटडोर यूनिट के आसपास वेंटिलेशन खराब होने पर हीट बाहर नहीं निकल पाती। इससे कंप्रेसर ओवरहीट हो सकता है और ब्लास्ट का खतरा बढ़ जाता है।
सवाल- क्या छोटे कमरे में बड़ा एसी लगाना रिस्की है?
जवाब- बड़ा एसी छोटे कमरे में ‘शॉर्ट साइक्लिंग’ करता है। यानी बार-बार जल्दी-जल्दी ऑन-ऑफ होता है। इससे कंप्रेसर पर दबाव बढ़ता है और एसी जल्दी खराब हो सकता है।
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