क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट
रेलिगेयर ब्रोकिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (रिसर्च) अजित मिश्रा ने कहा, “वैश्विक स्तर पर, अमेरिका-ईरान संघर्ष से जुड़े घटनाक्रम और ब्रेंट क्रूड की चाल बाजार के प्रमुख उत्प्रेरक बने रहेंगे। इस सप्ताह अमेरिकी फेडरल रिजर्व का मौद्रिक नीति निर्णय और ब्याज दरों के भविष्य के रुख पर उसकी टिप्पणी पर भी नजर रहेगी।”
उन्होंने कहा कि घरेलू मोर्चे पर अगस्त के थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति के आंकड़ों के साथ ही बेरोजगारी और व्यापार संतुलन के आंकड़े भी चर्चा में रहेंगे।
15-16 सितंबर को फेड रिजर्व की मीटिंग पर निगाह
रिसर्च एक्सपर्ट फर्म एचएसटी वेल्थ के संस्थापक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) हरिसेल्वन राधाकृष्णन ने कहा, ”तात्कालिक नजर अमेरिकी मुद्रास्फीति और फेडरल रिजर्व के नीतिगत निर्णय पर होगी।” उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति के जोखिमों के चलते वैश्विक बॉण्ड प्रतिफल और डॉलर पर दबाव बढ़ सकता है। इसलिए 15-16 सितंबर को होने वाली फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) की बैठक इस सप्ताह का प्रमुख वैश्विक उत्प्रेरक होगी।
कच्चे तेल की कीमतें बनी सबसे बड़ी बाधा
उन्होंने कहा कि भारत के लिए कच्चा तेल सबसे बड़ा बाहरी जोखिम बना हुआ है। यदि पश्चिम एशिया से कच्चे तेल की आपूर्ति में व्यवधान बढ़ता है और कीमतों में तेजी आती है, तो इससे मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ सकता है, आयात बिल बढ़ सकता है, रुपये पर दबाव आ सकता है और कंपनियों का मार्जिन घट सकता है।
बीते सप्ताह बीएसई का मानक सूचकांक सेंसेक्स 1,733.67 अंक या 2.26 प्रतिशत टूटा, जबकि एनएसई निफ्टी में 499.6 अंक या दो प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
(यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश से पहले सूझ-बूझ के साथ फैसला करें। यहां प्रस्तुत एक्सपर्ट्स के विचार निजी हैं। लाइव हिन्दुस्तान इस आधार पर शेयरों को खरीदने और बेचने की सलाह नहीं देता है।
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