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आने वाले दिनों में आपका होम लोन और कार लोन महंगा हो सकता है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने रिसर्च रिपोर्ट में दावा किया है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया रेपो रेट में बढ़ोतरी कर सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, RBI अक्टूबर की क्रेडिट पॉलिसी में रेपो रेट 0.25% बढ़ा सकता है, इसके बाद दिसंबर में भी इतनी ही बढ़ोतरी कर सकता है। यानी 0.50% तक रेपो रेट बढ़ सकते हैं।
हाल ही में अगस्त में हुई मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक में RBI ने रेपो रेट को लगातार चौथी बार 5.25% पर स्थिर रखा था। हालांकि, अब अक्टूबर 5 से 7 के बीच होने वाली अगली MPC बैठक में दरें बढ़ाना लगभग तय माना जा रहा है।
SBI रिसर्च का दावा: कच्चे तेल और महंगाई के कारण रेपो रेट बढ़ाना जरूरी
एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें हाल ही में 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं। जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताओं के कारण अगले 15 दिनों में क्रूड का भाव औसतन 105 डॉलर से लेकर 123 डॉलर प्रति बैरल तक भी पहुंच सकता है।
इसके अलावा देश में महंगाई का दायरा लगातार चौड़ा हो रहा है। कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) में 90% हिस्सेदारी रखने वाली जरूरी वस्तुओं की संख्या जनवरी 2026 में 22 थी, जो जुलाई तक बढ़कर 53 हो गई है। क्रूड ऑयल, नेचुरल गैस, बेवरेजेज, फार्मास्युटिकल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर्स में इनपुट कॉस्ट (उत्पादन लागत) तेजी से बढ़ी है, जिसका सीधा बोझ अब ग्राहकों पर डाला जा रहा है।
इसी वजह से रिपोर्ट में आरबीआई को सलाह दी गई है कि महंगाई को काबू में करने के लिए रेपो रेट तुरंत बढ़ाया जाए। रिपोर्ट में यह भी साफ किया गया है कि आरबीआई का यह फैसला अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख से नहीं, बल्कि घरेलू आर्थिक जोखिमों पर आधारित होगा।
आम आदमी की जेब पर क्या असर पड़ेगा?
आरबीआई के रेपो रेट में किसी भी बदलाव का सीधा असर देश के करोड़ों कर्जदारों और बैंक में पैसे जमा करने वाले एफडी (FD) निवेशकों पर पड़ता है:
- फ्लोटिंग रेट लोन वाले कर्जदारों पर असर: बैंकों के लोन की दरें आरबीआई के रेपो रेट से सीधे जुड़ी (Repo-linked) होती हैं। रेपो रेट बढ़ते ही बैंक अपनी कर्ज दरें बढ़ा देते हैं, जिससे मौजूदा फ्लोटिंग रेट लोन की मंथली EMI बढ़ जाती है।
- नए लोन लेने वालों के लिए महंगा सौदा: नए ग्राहकों के लिए होम लोन, ऑटो लोन या पर्सनल लोन पर मिलने वाली ब्याज दरें पहले की तुलना में अधिक हो जाएंगी। हालांकि, फिक्स्ड-रेट लोन लेने वालों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
- एफडी (FD) कराने वालों को फायदा: रेपो रेट बढ़ने का एक बड़ा फायदा जमाकर्ताओं को मिलता है। जब बैंक रेपो रेट बढ़ने पर कर्ज महंगा करते हैं, तो वे अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाले ब्याज को भी बढ़ा देते हैं।
मैथ्स समझें: ₹50 लाख के होम लोन पर कितनी बढ़ जाएगी EMI?
मान लीजिए आपने ₹50 लाख का होम लोन 20 साल की अवधि के लिए 8.25% की फ्लोटिंग ब्याज दर पर लिया है।
- मौजूदा स्थिति: आपकी मासिक किश्त (EMI) ₹42,603 बनती है।
- 0.50% बढ़ोतरी के बाद: यदि आरबीआई रेपो रेट में कुल 0.50% की बढ़ोतरी करता है और बैंक इसका पूरा बोझ ग्राहकों पर डालते हैं, तो लोन की ब्याज दर बढ़कर 8.75% हो जाएगी।
- नई EMI: इस नई दर पर आपकी मासिक किश्त बढ़कर लगभग ₹44,186 हो जाएगी।
- सीधा असर: यानी आपको हर महीने ₹1,583 ज्यादा किश्त देनी होगी और पूरे साल में आपका खर्च ₹18,996 बढ़ जाएगा।
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