चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी में आयोजित पासिंग-आउट परेड में उन्हें 5 सितंबर को कमीशन प्रदान किया गया। हालांकि लद्दाख से चेन्नई पहुंची स्टैनजिन का सफर आसान नहीं था।
कम उम्र में छोड़ा घर, हॉस्टल में बिताए 14 साल
स्टैनजिन के पिता एक टीचर हैं और मां गृहणी। स्टैनजिन ने कम उम्र में ही घर छोड़कर पढ़ाई शुरू कर दी थी। उन्होंने लेह के लैमडन मॉडल स्कूल से शिक्षा हासिल की और करीब 14 साल हॉस्टल में रहकर पढ़ाई की। पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन के बाद उन्हें असम की तेजपुर यूनिवर्सिटी में दाखिला मिला, जहां उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।
एनसीसी की ज्वॉइन
यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान उन्होंने नेशनल कैडेट कोर (NCC) ज्वाइन किया। यहीं से उन्हें भारतीय सेना में अधिकारी बनने के बारे में पता चला। उन्होंने बताया कि NCC के जरिए उन्हें पता चला कि वह अधिकारी के तौर पर सेना में शामिल हो सकती हैं। बस, क्या था इसके लिए उन्होंने दिन-रात मेहनत शुरू कर दी।
बनीं आर्मी ऑफिसर
उनके लिए यह रास्ता बिल्कुल नया, अनजान और चुनौतियों से भरा था। ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी चेन्नई के लिए कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज परीक्षा और फिर एसएसबी इलाहाबाद का कठिन इंटरव्यू क्लियर करना आसान नहीं था। लेकिन उन्होंने सारी बाधाओं को दरकिनार किया और आज आर्मी में ऑफिसर बनीं।
2016 तक थीं राष्ट्रीय स्तर की वॉलीबॉल खिलाड़ी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सेना में जाने से पहले स्टैनजिन खेलों में भी अपनी पहचान बना चुकी थीं। वह 2016 तक राष्ट्रीय स्तर की वॉलीबॉल खिलाड़ी रहीं। खेलों ने उनके अंदर अनुशासन, मेहनत और टीम भावना को मजबूत किया, जिसका फायदा उन्हें सैन्य ट्रेनिंग के दौरान भी मिला।
माता-पिता के लिए गौरव का पल
वहीं, जब चेन्नई पहुंचे उनके माता-पिता ने कहा कि वो पहली बार चेन्नई आए हैं, वो भी इसका कारण उनकी बेटी थी। उन्हें इस बात पर गर्व है कि उनकी बेटी देश की सेवा करने जा रही है। बता दें कि उनकी उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि वह अपने क्षेत्र की अन्य लड़कियों के लिए एक मिसाल बन गई हैं।
342 कैडेट्स हुए कमीशन
ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी के इस बैच में कुल 342 कैडेट्स, जिनमें 313 पुरुष और 29 महिलाएं शामिल थीं, जिनको अलग-अलद सैन्य सेवाओं में कमीशन दिया गया। इसके अलावा मित्र देशों के 17 कैडेट्स ने भी अपना सैन्य प्रशिक्षण पूरा किया। इनमें सेशेल्स, तंजानिया, युगांडा, जिम्बाब्वे, इस्वातिनी, भूटान और लेसोथो के 7 पुरुष और 10 महिला कैडेट्स शामिल थे।
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