शेयर बाजार में पैसा लगाने वाले हर निवेशक के मन में कभी न कभी यह सवाल जरूर आता है कि क्या किसी शेयर में लगाया गया पैसा पूरी तरह खत्म भी हो सकता है. कई मामलों में ऐसा हुआ भी है जब कंपनियां दिवालिया हो गईं या उनके शेयर बाजार से हट गए और निवेशकों के हाथ कुछ नहीं लगा. इसलिए निवेश करते समय यह समझना जरूरी है कि किन हालात में शेयर में लगा पैसा डूब सकता है और कब एक समझदार निवेशक को उम्मीद छोड़कर बाहर निकल जाना चाहिए. सही समय पर फैसला लेना ही लंबे समय में निवेशक को बड़े नुकसान से बचा सकता है.
किसी शेयर की वैल्यू लगभग 0 हो जाना बहुत आम नहीं है. (Photo-AI)
यही वजह है कि निवेश करने से पहले यह समझना जरूरी होता है कि शेयर बाजार में जोखिम कितना बड़ा हो सकता है. कई बार कंपनी बंद हो जाती है, कभी उसके शेयर बाजार से हट जाते हैं और कभी कंपनी का कारोबार ही खत्म हो जाता है. ऐसे हालात में निवेशकों को यह समझना पड़ता है कि उम्मीद बनाए रखना ठीक है या नुकसान स्वीकार करके बाहर निकल जाना ज्यादा समझदारी है.
कब पूरी तरह डूब सकता है पैसा
सबसे बड़ा खतरा तब होता है जब कोई कंपनी दिवालिया हो जाती है. दिवालिया होने के बाद कंपनी की संपत्ति बेचकर सबसे पहले बैंकों और कर्ज देने वालों का पैसा चुकाया जाता है. इसके बाद ही शेयरधारकों की बारी आती है. ज्यादातर मामलों में तब तक कंपनी के पास इतना पैसा बचता ही नहीं कि शेयरधारकों को कुछ मिल सके.
दूसरी स्थिति तब बनती है जब किसी कंपनी का शेयर बाजार से हटा दिया जाता है. अगर कंपनी नियमों का पालन नहीं करती या किसी बड़े घोटाले में फंस जाती है तो शेयर बाजार उसे कारोबार करने की अनुमति नहीं देता. ऐसी स्थिति में निवेशकों के पास शेयर तो रह जाते हैं, लेकिन उन्हें बेच पाना लगभग नामुमकिन हो जाता है.
कभी-कभी कंपनी पूरी तरह बंद नहीं होती, लेकिन उसकी हालत इतनी खराब हो जाती है कि शेयर की कीमत लगभग खत्म हो जाती है. कई छोटे शेयरों में ऐसा देखा गया है जहां कीमत 90 से 99 प्रतिशत तक गिर जाती है. तकनीकी रूप से निवेश बना रहता है, लेकिन उसकी कीमत लगभग शून्य जैसी हो जाती है.
कब निवेशक को छोड़ देनी चाहिए उम्मीद
कुछ संकेत ऐसे होते हैं जो बताते हैं कि किसी कंपनी से बाहर निकल जाना ही बेहतर है. अगर कंपनी लगातार कई सालों से घाटे में चल रही है और उसके कारोबार में सुधार की कोई संभावना नहीं दिख रही है, तो निवेशक को सावधान हो जाना चाहिए.
- अगर कंपनी के मालिकों या प्रबंधन पर पैसों की गड़बड़ी या धोखाधड़ी के आरोप सामने आते हैं तो यह भी बड़ा खतरे का संकेत होता है. ऐसे मामलों में अक्सर कंपनी की विश्वसनीयता खत्म हो जाती है और शेयर की कीमत लंबे समय तक दबाव में रहती है.
- कर्ज भी कई कंपनियों को डुबो देता है. जब कंपनी की कमाई का बड़ा हिस्सा सिर्फ कर्ज का ब्याज चुकाने में ही खर्च होने लगे और कर्ज लगातार बढ़ता जाए तो यह स्थिति बहुत खतरनाक मानी जाती है.
- कभी-कभी पूरा कारोबार ही समय के साथ खत्म होने लगता है. जैसे पहले पेजर और टाइपराइटर का बड़ा बाजार हुआ करता था, लेकिन तकनीक बदलने के बाद यह कारोबार लगभग गायब हो गया. ऐसे सेक्टर में काम करने वाली कंपनियों के शेयर भी धीरे धीरे खत्म हो गए.
कई बड़े मामलों में निवेशकों को नहीं मिला कुछ
पिछले कुछ सालों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां कंपनियां बंद हुईं या उनका पुनर्गठन हुआ और पुराने शेयरधारकों को कुछ भी नहीं मिला. उदाहरण के तौर पर जेट एयरवेज (Jet Airways) के मामले में अदालत ने कंपनी को खत्म करने का आदेश दिया और शेयरधारकों को कोई भुगतान नहीं मिला. इसी तरह एबीजी शिपयार्ड (ABG Shipyard) और गीतांजलि जेम्स (Gitanjali Gems) जैसे मामलों में भी कंपनियां दिवालिया प्रक्रिया में चली गईं और शेयर बाजार से हट गईं. ऐसे मामलों में कंपनी की संपत्ति बेचकर सबसे पहले बैंकों और कर्ज देने वालों को पैसा दिया गया. भूषण पावर एंड स्टील (Bhushan Power and Steel) और अमटेक ऑटो (Amtek Auto) जैसे मामलों में कंपनियां नए मालिकों के पास चली गईं, लेकिन पुराने शेयरधारकों के शेयर खत्म कर दिए गए और उन्हें कोई मूल्य नहीं मिला.
जोखिम ही देता है ज्यादा मुनाफा
आर्थिक नजरिये से देखें तो शेयर बाजार में ज्यादा मुनाफा मिलने की संभावना इसी जोखिम के कारण होती है. बड़ी और मजबूत कंपनियों में पैसा पूरी तरह डूबने का खतरा कम होता है, लेकिन छोटी और कमजोर कंपनियों में यह जोखिम बहुत ज्यादा होता है. इसलिए किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले कंपनी का कारोबार, कर्ज और प्रबंधन की साख समझना जरूरी है. सही जानकारी और समय पर लिया गया फैसला ही निवेशक को बड़े नुकसान से बचा सकता है.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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