एसबीआई की स्थापना एक जुलाई, 1955 को संसद के कानून के तहत हुई थी।
देश के सबसे बड़े ऋणदाता एसबीआई का कुल कारोबार जून, 2026 के अंत में बढ़कर ₹110.01 लाख करोड़ हो गया है। इसमें बैंक के कुल ऋण और अग्रिम शामिल हैं।
बैंक ने पिछले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में पहली बार ₹100 लाख करोड़ के कुल कारोबार का आंकड़ा पार किया था।
शेट्टी ने कहा कि एसबीआई की वृद्धि की गति भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन से गहराई से जुड़ी हुई है। यदि भारतीय अर्थव्यवस्था 7-8 प्रतिशत की दर से बढ़ती है, तो बैंक के बही-खाते में सालाना करीब 11-12 प्रतिशत की वृद्धि की क्षमता है। ऐसी स्थिति में बैंक का कारोबार लगभग हर छह वर्ष में दोगुना हो सकता है।
शेट्टी ने पीटीआई-के साथ साक्षात्कार में स्पष्ट किया कि 2030 के लिए ₹200 लाख करोड़ का कोई औपचारिक लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया है, बल्कि यह मौजूदा वृद्धि के आधार पर संभावित स्तर है।
एसबीआई ने अपने ‘दृष्टिकोण 2030’ के तहत ग्राहकों, कर्मचारियों, शेयरधारकों तथा सरकार और नियामकों-इन चार प्रमुख हितधारकों की जरूरतों को प्राथमिकता दी है। बैंक का लक्ष्य ग्राहकों के अनुभव में सुधार, कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ाने, शेयरधारकों के लिए मूल्य सृजन और देश की आर्थिक वृद्धि में अपनी भूमिका को मजबूत करना है।
शेट्टी ने कहा कि बैंक कृषि, सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) और ग्रामीण अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों को समर्थन देने के साथ बचत जुटाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।
उन्होंने कहा कि सूक्ष्म स्तर पर ऋण वृद्धि को समर्थन देने के लिए पर्याप्त पूंजी बनाए रखना महत्वपूर्ण लक्ष्य है।
पूंजी के मोर्चे पर एसबीआई साझा इक्विटी टियर-1 (सीईटी1) अनुपात करीब 12 प्रतिशत और पूंजी पर्याप्तता अनुपात (सीआरएआर) करीब 15 प्रतिशत बनाए रखने का लक्ष्य रखता है।
वहीं, बैंक लगातार अपनी दक्षता और उत्पादकता बढ़ाकर लागत-से-आय अनुपात में करीब 2-3 प्रतिशत अंक की कमी लाने पर भी ध्यान दे रहा है।
चेयरमैन ने कहा कि विशेष लक्ष्य और आंकड़े हर साल अनुमान और प्रगति के आधार पर बदलते हैं। लेकिन ये व्यापक लक्ष्य विभिन्न आर्थिक चक्रों में एसबीआई की रणनीति को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।
डिस्क्लेमर: प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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