भारत की वित्तीय सहायता से जारी संपर्क परियोजना के तहत मालदीव की राजधानी माले को विलिंगिली द्वीप से जोड़ने वाले पुल का अंतिम हिस्सा आधिकारिक रूप से स्थापित कर दिया गया है। इसे इस महत्वपूर्ण संपर्क परियोजना की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। ‘ग्रेटर माले कनेक्टिविटी परियोजना’ (जीएमसीपी) के तहत 6.74 किलोमीटर लंबे पुल और सेतु-मार्ग का निर्माण किया जा रहा है।
यह राजधानी माले को विलिंगिली, गुल्हिफाल्हु और थिलाफुशी द्वीपों से जोड़ेगा। भारत और मालदीव ने 2021 में इस परियोजना के लिए समझौता किया था। मालदीव स्थित भारतीय उच्चायोग ने शनिवार को ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘ ग्रेटर माले संपर्क परियोजना ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की!
माले को विलिंगिली से जोड़ने वाले पुल का अंतिम हिस्सा आधिकारिक रूप से स्थापित कर दिया गया है। इससे द्वीपों के बीच निर्बाध संपर्क की दिशा में एक और कदम बढ़ा है।’’
मालदीव के पूर्व विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद ने भी इस उपलब्धि का स्वागत किया। उन्होंने कहा, ‘‘ग्रेटर माले संपर्क परियोजना में आज एक बड़ी उपलब्धि।
विदेश मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल में इस परियोजना की शुरुआत करना मेरे लिए सम्मान की बात थी। मालदीव-भारत संबंध विश्वास और साझा प्रगति पर आधारित है। यह संपर्क मार्ग उस प्रतिबद्धता और मालदीव के विकास के लिए भारत के समर्थन का प्रतीक है।’’
शाहिद ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के प्रति ‘गहरी कृतज्ञता’ भी व्यक्त की।
जीएमसीपी, जिसे थिलामाले पुल के नाम से भी जाना जाता है, भारत की ओर से दिए गए 10 करोड़ अमेरिकी डॉलर के अनुदान और 40 करोड़ अमेरिकी डॉलर की ऋण सुविधा से वित्तपोषित है। यह मालदीव की सबसे बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजना है। थिलामाले पुल परियोजना का ठेका भारत की कंपनी ‘एफकॉन इन्फ्रास्ट्रक्चर’ को 26 अगस्त 2021 में दिया गया था।
परियोजना का 75 प्रतिशत से अधिक काम अब पूरा हो चुका है।
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