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एआई जनरेटेड फोटो ।
भारत के फूड मार्केट में कोरियन नूडल्स यानी राम्यन का क्रेज एक नए बिजनेस मॉडल में बदल रहा है। ‘सेल्फ-सर्विस राम्यन बार’ में ग्राहक पसंद के नूडल्स का पैकेट चुनते हैं, उसमें अंडा, चीज या चिकन जैसी टॉपिंग्स और मसाले डालकर काउंटर पर खुद पकाते हैं। सुस्त मांग और बढ़ती लागत से जूझ रहे रेस्टोरेंट मालिकों के लिए यह कम निवेश, कम स्टाफ और ज्यादा मार्जिन वाला मॉडल बन रहा है।
वहीं, कोरियन नूडल्स कंपनियों को भी सुपरमार्केट से बाहर निकलकर सीधे ग्राहकों तक पहुंचने का एक नया और बड़ा बाजार मिल रहा है। चेन्नई के म्योन हब के फाउंडर विनोद कुमार के मुताबिक, एक सेल्फ-सर्विस राम्यन बार शुरू करने में करीब ₹20 लाख का खर्च आता है।
यह बड़े किचन, भारी इंफ्रास्ट्रक्चर और स्पेशल शेफ वाले पारंपरिक रेस्टोरेंट्स के मुकाबले काफी कम है। चूंकि यह पूरी तरह पैकेज्ड फूड है, इसलिए खाना खराब होने का रिस्क नहीं रहता और कम स्टाफ में भी काम चल जाता है। इसी फायदे को देखते हुए दक्षिण कोरिया की सबसे बड़ी नूडल्स कंपनियों में से एक नोंगशिम ने भारत में रिलायंस रिटेल के फ्रेशपिक के साथ हाथ मिलाया है। भारत में नोंगशिम के आधिकारिक डिस्ट्रीब्यूटर रामा विजन के डायरेक्टर उदित जैन ने बताया कि ये राम्यन बार ग्राहकों को बिना फुल-सर्विस रेस्टोरेंट गए कम दाम में असली कोरियन स्वाद और कस्टमाइजेशन का मौका दे रहे हैं।
‘बोबा भाई’ के फाउंडर ध्रुव कोहली के अनुसार, जेन जी (युवा) और वर्किंग प्रोफेशनल्स इसके सबसे बड़े ग्राहक हैं जो बार-बार आ रहे हैं। इस बढ़ती मांग का असर अब स्टार्टअप इन्वेस्टमेंट्स पर भी दिख रहा है। गुड़गांव के कोरियन फूड स्टार्टअप गिमी मिची ने इंडियाक्वेशेंट की अगुवाई में 10 लाख डॉलर की सीड फंडिंग जुटाई है। महज छह महीने पहले शुरू हुई इस कंपनी की नेट मासिक बिक्री 1 करोड़ रुपए पार कर गई है और यह हर महीने 60% की दर से बढ़ रही है, जिसकी आधी बिक्री टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रही है। इस ट्रेंड पर वॉव!
मोमो के फाउंडर सागर दरयानी ने बताया कि पूरे क्विक सर्विस रेस्टोरेंट (क्यूएसआर) सेक्टर के मेन्यू में अब कोरियन फूड शामिल हो चुका है। उनके खुद के पैकेज्ड कोरियन नूडल्स से हर महीने 1 करोड़ रुपए की कमाई हो रही है, जबकि उनका कुल नूडल्स बिजनेस ₹2 करोड़ महीना दे रहा है।
मार्केट – छोटे शहरों में कोरियन नूडल्स की भारी मांग, कुल नूडल्स बिक्री में 34% शेयर
डेटम इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के अनुसार क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ब्लिंकिट पर कुल नूडल्स बिक्री का 34% हिस्सा कोरियन नूडल्स का था। छोटे शहरों में इसकी मांग दिल्ली-एनसीआर के 31% के मुकाबले काफी ज्यादा रही, जिसमें कोच्चि में 45%, देहरादून में 44% और लुधियाना में 41% कोरियन नूडल्स बिके। ब्लिंकिट पर नोंगशिम और साम्यांग ब्रांड्स की हिस्सेदारी एक चौथाई रही।
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