रांची के बाजारों में मक्के का लड्डू नया हेल्थ ट्रेंड बन गया है. आजीविका दीदी पहल के तहत निर्मित इस लड्डू में हाई फाइबर और लो कैलोरी पाया जाता है. लिहाजा डाइट और फिटनेस के प्रति जागरूक लोगों की पहली पसंद बन रहा है. शुद्ध घी और गुड़ से बना यह स्वादिष्ट लड्डू किसान और खादी मेलों में उपलब्ध है.
पाचन तंत्र करे दुरुस्त
इस नए प्रयोग की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शुरुआत में संशय के बावजूद, अब इन लड्डुओं की भारी मांग है और लोग एडवांस बुकिंग करा रहे हैं. स्वाद के मामले में यह बेसन के लड्डू जैसा ही लजीज है, लेकिन सेहत के लिहाज से कहीं अधिक गुणकारी है. हाई फाइबर और लो कैलोरी होने के कारण यह पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है. यही वजह है कि डाइट को लेकर सचेत रहने वाले युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक, और यहां तक कि डॉक्टरों और आयुर्वेद विशेषज्ञों के बीच भी यह लड्डू काफी लोकप्रिय हो रहा है.
रोजाना 50 पैकेट लड्डू की सप्लाई
वर्तमान में सुनैना और उनकी टीम प्रतिदिन लगभग 50 पैकेट लड्डू दूसरे जिलों में भी भेज रही हैं. यदि आप इसे खरीदना चाहते हैं, तो यह सामान्य दुकानों के बजाय विशेष मेलों जैसे खादी मेला या किसान मेला में उपलब्ध होता है. रांची के बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के किसान मेले और मोराबादी के खादी मेले में इसे आसानी से प्राप्त किया जा सकता है. इसकी कीमत 250 रुपये प्रति आधा किलो और 500 रुपये प्रति किलो रखी गई है. यह पहल न केवल स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के लिए एक वरदान है, बल्कि स्थानीय महिलाओं के स्वावलंबन और पारंपरिक खान-पान को आधुनिक बाजार में पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम है.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.
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