प्राइम वीडियो पर फिल्म अरुलवान ट्रेंड कर रही है। इस फिल्म की कहानी शानदार है। एक छोटी आदिवासी लड़की जो शिक्षा के दम पर अपने गांव को बचा लेती है। फिल्म को IMDB पर भी शानदार रेटिंग मिली है।
आदिवासी गांव की कहानी
फिल्म अरुलावान की कहानी एक आदिवासी गांव में रहने वाले अनपढ़ लोगों की है। ऐसे लोग जो शहरी जीवन से दूर पहाड़ों और जंगलों के बीच अपनी अलग दुनिया में रहते हैं। ऐसे लोग जिन्होंने कभी बड़ी बिल्डिंग, पक्की सडकें नहीं देखी। फिल्म की शुरुआत घने जंगल में रह रहे आदिवासी लोगों से होती है। वो अपने संघर्षों के साथ जीवन जे रहे हैं। एक ऐसा आदिवासी गांव है जहां शिक्षा का नहीं है। बच्चे जंगलों में खेलकूद करके दिन काट देते हैं। इसी आदिवासी समूह में एक कुरंजी नाम की बच्ची है जो पढ़ना चाहती है। किताब के फटे पन्नों को वो ऐसे निहारती है जैसे उसे सबसे कीमती चीज क्यों मिल गई हो।
कुरंजी अपने गांव को बचाने के लिए लड़ती है
कुरुंजी अपने पिता से जिद्द कर शहर पहुंच जाती है। वो पक्की सड़कों को देखती है, बड़ी बिल्डिंग उसे हैरान करती है। वो स्कूल देखकर खुश हो जाती है। स्कूल जाते बच्चों की यूनिफार्म उसे अट्रेक्ट करती है। लेकिन उसे स्कूल का चौकीदार बेइज्जत करता है। उसे धक्का देकर भगा देता है। कुरंजी के पिता बेटी की इस हालत को देखकर दुखी हो कर रो पड़ता है। लेकिन कुरंजी अब शब्दों को जोड़ना सीख लेती है। वो शब्दों की पहचान करना सीख गई है।
कुरंजी कलेक्टर तक पहुंचती है
ऐसे एक दिन गांव को एक नोटिस मिलता है। फिल्म का विलेन इस जगह को हथियाने के लिए एक नोटिस भिजवाता है। इस नोटिस में में क्या लिखा है ये कोई नहीं जानता। गांव के लोग अनपढ़ हैं। लेकिन उनपर दबाव बनाया जाता है कि वो नोटिस पर अंगूठा लगाकर गांव की जमीन विकास के लिए दे दें। लेकिन कुरंजी समझ जाती है कि ये गांव के लिए सही नहीं है। वो पढ़ना शुरू देती है और नोटिस पर लिखे कलेक्टर की जानकारी लेकर उससे मिलने निकल पड़ती है।
कुरंजी पर सबको गर्व होता है
कुरंजी रात के अंधेरे में शहर जाती है। अकेली, वोलोगों से लिफ्ट मांगती है और सरकारी दफ्तर डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर के ऑफिस पहुंच जाती है। उसके हाथ में वो नोटिस होता है। कुरंजी बड़ी मेहनत से कलेक्टर तक पहुंच जाती है। उसकी बात अब सुनी जाती है। कलेक्टर एक टीम का गठन करता है और आदिवासी गांव की सही स्थिति का पता लगाने का आदेश देता है। उसे पता चलता है कि कुछ लोग अवैध तरीके से उस जगह को हडपना चाहते हैं। दूसरी तरफ विलेन को पता चल जाता है कि कुरंजी बड़े अधिकारियों तक पहुंच गई है। ऐसे में उसकी जान को भी खतरा होता है। लेकिन कलेक्टर उसे अपनी बेटी मान कर उसकी रक्षा करता है। कहानी के अंत में कलेक्टर की मदद से कुरंजी अपने गांव को बचा लेती है। गांव वालों को समझ आता है कि शिक्षा कितनी जरूरी है। अगर कुरंजी इतनी समझदार नहीं होती तो वो शायद कभी गांव को नहीं बचा पाती। कुरंजी के पिता को भी उस पर गर्व होता है।
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