prachi chauhan success story: प्राची मैथ की स्टूडेंट थीं। जब उन्होंने UPSC की तैयारी करने का फैसला तब किया जब वह BSc के दूसरे साल में थीं। दिचलस्प बात यह है कि उन्हें कई सालों तक यूपीएससी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी और ना ही ये पता था कि इसका सिलेबस और परीक्षा पैटर्न क्या है।
कौन हैं प्राची चौहान
प्राची चौहान, मध्य प्रदेश में विदिशा जिले के छोटे से गांव जौहद से आती हैं। उनके पिता का नाम चंद्रभान सिंह चौहान है, जो एक किसान हैं, जबकि उनकी मां साधना सिंह चौहान एक हाउसवाइफ हैं। यूट्यूब पर दिए एक इंटरव्यू में वो बताती हैं कि वो एक ऐसे परिवार से आती हैं, जहां इनकम सोर्स अधिक नहीं। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई अपने गांव के एक सरकारी स्कूल से पूरी की। उन्होंने बताया कि वो ऐसे स्कूल में पढ़ी हैं, जहां कोई बिल्डिंग नहीं थी, पेड़ के नीचे बेंच लगाकर पढ़ना पड़ता था। लैब के नाम पर उनके पास एक छोटी-सी अलमारी हुआ करती थी।
कॉलेज में UPSC के बारे में पता भी नहीं था
प्राची मैथ की स्टूडेंट थीं। जब उन्होंने UPSC की तैयारी करने का फैसला तब किया जब वह BSc के दूसरे साल में थीं। दिचलस्प बात यह है कि उन्हें कई सालों तक यूपीएससी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी और ना ही ये पता था कि इसका सिलेबस और परीक्षा पैटर्न क्या है। इसके अलावा उनके परिवार या रिश्तेदारों को भी नहीं पता था कि यूपीएससी क्या होती है। लेकिन उन्हें सरकारी दफ्तरों में जाने का मौका मिला, तो वहां से पता चला कि कलेक्टर क्या होते हैं और इनका कार्य क्या होता है। वहीं से उन्हें प्रेरणा मिली।
यूपीएससी की तैयारी की शुरू
जब वो ग्रेजुएशन के अंतिम साल में पहुंची, तो यहां से यूपीएससी की तैयारी में शुरू कर दी। हालांकि यूपीएससी की जर्नी उनके लिए आसान नहीं थी। वो पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ी थीं। साथ ही पिता किसान थे, तो तैयारी के लिए संसाधन बेहद सीमित थे। इसके बावजूद भी उन्होंने आईएएस ऑफिसर बनने का सपना देखा।
पहले अटेंप्ट में गलत भर दिया था OMR शीट
वीडियों में वो अपने पहले अटेंप्ट के बारे में बताते हुए कहा कि जब पहली बार यूपीएससी एग्जाम हॉल में घुसी तो इतना प्रेशर महसूस कि ओएमआर शीट ही गलत भर दी थी। इसके बाद उन्होंने दूसरा और तीसरा अटेंप्ट दिया और इसमें प्रीलिम्स को पास कर लिया। लेकिन सही मेंस में निराशा हाथ लगी।
तीन बार फेल होने की वजहें
इसके पीछे की वजह सही मार्गदर्शन और आर्थिक और सामाजिक दबाव भी था। वो अपने इंटरव्यू में बताती हैं कि वे ऐसे समाज से आती हैं जहां यह माना जाता है कि अगर लड़की को पढ़ने के लिए बाहर भेजेंगे तो कोई शादी नहीं करेगा। साथ ही पिता किसान थे, तो आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से वो बाहर जाकर कोचिंग कर सकें।
चौथे प्रयास में हासिल की 260वीं रैंक
तीन बार फेल होने के बाद प्राची यूपीएससी की कोचिंग के लिए दिल्ली आ गईं और अपनी कमियों पर काम किया। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई। उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में हिंदी मीडियम के टॉपर्स में जगह बनाई और UPSC AIR 260वीं रैंक हासिल की। प्राची चौहान की कहानी साबित करती है कि सफलता के लिए लगातार मेहनत और प्रयास सबसे ज्यादा जरूरी है।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.