देश की परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित की जाने वाली परीक्षाओं में संरचनात्मक और तकनीकी सुधार लाने के लिए इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक उच्चाधिकार प्राप्त कार्यबल (Task Force) का गठन किया गया है। प्रधानमंत्री ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर जारी एक वीडियो संदेश के माध्यम से देश को यह जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार इस कार्यबल के सुझावों को पूर्ण रूप से लागू करेगी, ताकि अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के उपयोग से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके।
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प्रधानमंत्री की यह घोषणा 36 दिनों तक चले उस आंदोलन के समाप्त होने के एक दिन बाद आई, जिसका नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने किया था। यह आंदोलन धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे के साथ समाप्त हुआ था।
इस कार्यबल में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों का एक समूह शामिल होगा।
नीलेकणि के अलावा कार्यबल के अन्य सदस्यों में इसरो के पूर्व निदेशक एस. सोमनाथ, आसूचना ब्यूरो (आईबी) के पूर्व निदेशक तपन डेका, आईआईटी चेन्नई के निदेशक वी. कामकोटी, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवल और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा शामिल हैं।
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इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि ‘‘देश के युवाओं के भविष्य से जुड़ा मामला होने पर किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।’’
जोशी को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और सुरक्षित बनाने के लिए प्रौद्योगिकी आधारित सुधारों को आगे बढ़ाने के संबंध में सरकार ने नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय कार्यबल का गठन किया है।
जोशी ने रविवार शाम इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की।
संसद में प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं पर कड़ी रोक लगाने संबंधी प्रस्तावित विधेयक के मद्देनजर इस मुलाकात को अहम माना जा रहा है।
नीलेकणि ने ‘आधार’ परियोजना को जमीनी स्तर पर साकार करने में अहम भूमिका निभाई थी और वह भारत में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना प्रणाली को लाने वाले मुख्य व्यक्ति थे।
मोदी ने कहा, ‘‘परीक्षा सुधारों के लिए नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय कार्यबल का गठन किया गया है।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार त्रुटिरहित और पूरी तरह सुरक्षित परीक्षा प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए कार्यबल के सुझावों पर काम करेगी।
उन्होंने कहा कि यह कार्यबल विशेष रूप से प्रौद्योगिकी के दृष्टिकोण से एनटीए की परीक्षाओं को नया स्वरूप देने और परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक सुधार लाने में मदद करेगा।
मोदी ने कहा कि छात्रों के भविष्य के लिए भारत सरकार लगातार कई तरह के कदम उठा रही है।
उन्होंने कहा कि ‘‘जिन्होंने छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया’’, उन्हें जेल भेज दिया गया है और सरकार सोमवार को संसद में परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ़ कड़ा कानून लाने के लिए एक नया विधेयक पेश करने जा रही है।
मोदी ने कहा, ‘‘लेकिन हमें भविष्य के बारे में सोचना होगा। यह पक्का करने के लिए कि हमारी परीक्षा प्रणाली भरोसेमंद और पारदर्शी हो और टेक्नोलॉजी का सही तरीके से इस्तेमाल हो, हमने दुनिया के जाने-माने प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति बनाने का फ़ैसला किया है।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कार्यबल का गठन किया गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह परीक्षा सुधारों पर केंद्रित होगा। जैसे ही हमें रिपोर्ट मिलेगी, हम भविष्य की परीक्षाओं को विश्वसनीय बनाने के लिए इसके सुझावों को लागू करेंगे।
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