Janmashtami 2026: जन्माष्टमी मनाने और ठाकुर जी के दर्शन के लिए लोग मथुरा-वृंदावन जाते हैं। अगर आप भी इस दिन जाने की तैयारी कर रहे हैं, तो पहले कुछ जरूरी बातें जान लीजिए।
कब मनाई जाएगी जन्माष्टमी
जन्माष्टमी 4 सितंबर को देशभर में मनाई जाएगी लेकिन कुछ पंचांग के अनुसार 5 सितंबर को भी कुछ जगहों पर मना सकते हैं। हालांकि, मंदिर में श्रीकृष्ण से जुड़े कार्यक्रम 4 सितंबर को आयोजित किए जाएंगे।
मथुरा-वृंदावन में कहां-कहां घूमें?
श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर
मथुरा की यात्रा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर सबसे सुंदर मंदिरों में से एक है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म यहीं हुआ था और जन्माष्टमी की रात यहां विशेष पूजा और जन्मोत्सव का आयोजन होता है। आधी रात के समय मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ सकती है।
द्वारकाधीश मंदिर
मथुरा का द्वारकाधीश मंदिर भी भक्तों के लिए खास आकर्षण रहता है। यहां भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप और कई झांकियों के दर्शन किए जा सकते हैं। सामान्य दिनों में मंदिर के दर्शन अलग-अलग पूजा और भोग के समय के अनुसार होते हैं, लेकिन त्योहार पर समय में बदलाव हो सकते हैं।
विश्राम घाट
मथुरा पहुंचने पर यमुना किनारे स्थित विश्राम घाट जाना भी यात्रा का हिस्सा बनाया जा सकता है। यहां शाम के समय घाट का धार्मिक और आध्यात्मिक माहौल देखने को मिलता है।
बांके बिहारी मंदिर
वृंदावन का बांके बिहारी मंदिर जन्माष्टमी के दौरान सबसे ज्यादा आकर्षण वाले मंदिरों में शामिल रहता है। खास बात यह है कि यहां जन्माष्टमी के दिन विशेष रूप से मंगला आरती होती है।
प्रेम मंदिर
प्रेम मंदिर अपनी भव्य सुंदरता और रोशनी के लिए प्रसिद्ध है। जन्माष्टमी के दौरान मंदिर की सजावट और माहौल श्रद्धालुओं को खास आकर्षित करता है। यहां पर आप रात में पहुंचेंगे तो आपको खूब रौनक मिलेगी।
इस्कॉन मंदिर
वृंदावन का इस्कॉन मंदिर भी जन्माष्टमी के दौरान भक्तों से गुलजार रहता है। यहां भजन, कीर्तन और विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। जन्माष्टमी के दौरान शाम और रात में यहां भीड़ बढ़ सकती है।
ट्रैवल के दौरान 5 बातों का रखें ध्यान
1. भीड़ के लिए तैयार रहें
जन्माष्टमी के दिन मथुरा और वृंदावन में सामान्य दिनों की तुलना में काफी ज्यादा भीड़ रहती है। खासकर शाम और आधी रात के आसपास प्रमुख मंदिरों के आसपास भीड़ बढ़ सकती है। मंगला आरती या फिर दर्शन के लिए भयंकर भीड़ होती है।
2. मंदिरों का समय पहले चेक करें
त्योहार के दिन मंदिरों के सामान्य दर्शन समय में बदलाव हो सकता है। इसलिए निकलने से पहले मंदिर की आधिकारिक सूचना या वेबसाइट पर लेटेस्ट दर्शन व्यवस्था जरूर जांच लें। कुछ मंदिरों के कार्यक्रमों की डिटेल्स आपको वहां से मिल सकती हैं।
3. कम सामान लेकर जाएं
भीड़भाड़ वाले इलाके में बड़े बैग या गैर जरूरी सामान ले जाने से परेशानी हो सकती है। कई मंदिरों में चेकिंग और सामान से जुड़े नियम लागू हो सकते हैं। इसके अलावा मथुरा-वृंदावन में आपको काफी पैदल चलना पड़ सकता है। इसलिए गर्मी-बरसात के हिसाब से आरामदायक कपड़े और ऐसे जूते पहनें जिनमें लंबे समय तक चलने में परेशानी न हो।
4. होटल-ट्रेन टिकट पहले बुक करें
ट्रैवल करने से पहले ही अपनी ट्रेन-बस का कंफर्म टिकट बुक कर लें, जनरल में ट्रैवल करने का प्लान भारी पड़ सकता है। उस दिन ट्रेन-बसों में खूब भीड़ होती है। मथुरा-वृंदावन पहुंचने से पहले होटल रूम बुक कर लें। इससे वहां कोई परेशानी नहीं होगी।
5. पानी और जरूरी सामान साथ रखें
सितंबर में मौसम बदलता रहता है। यात्रा के दौरान पानी की बोतल, छाता या रेनकोट और जरूरी दवाइयां साथ रखें। साथ ही बच्चे और बूढ़ों का खास ख्याल रखें और उनके हिसाब से खाने-पीने का सामान रखें।
2 दिन की करें प्लानिंग-
पहला दिन- मथुरा: श्रीकृष्ण जन्मभूमि → द्वारकाधीश मंदिर → विश्राम घाट → शाम के धार्मिक कार्यक्रम → रात में जन्मोत्सव
दूसरा दिन- वृंदावन: बांके बिहारी मंदिर → राधारमण मंदिर → इस्कॉन मंदिर → प्रेम मंदिर → शाम को वृंदावन भ्रमण।
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