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Pakistan Wants Diplomatic Talks: पाकिस्तान भी गजब का देश है, कभी युद्ध पर उतारू हो जाता है तो कभी अपनी फौज की हालत देखकर उसे कूटनीति याद आ जाती है. पाक प्रेसिडेंट आसिफ अली जरदारी ने अपनी संसद में भाषण के दौरान कुछ ऐसा ही कहा है, उन्होंने एक तरफ तो कहा कि वे भारत को जवाब देने के लिए तैयार हैं, तो दूसरे ही पल कूटनीतिक वार्ता की गुहार लगाने लगे.
पाकिस्तान के राष्ट्रपति को याद आई कूटनीति. (Credit- Social Media)
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था संकट में है और राजनीतिक विभाजन इस वक्त चरम पर है. ऐसे समय में कश्मीर मुद्दे और राष्ट्रवादी भावनाओं को जोर देना साफ तौर पर ऐसा लग रहा है कि टॉप लीडरशिप जनता का ध्यान भटकाना चाहती है. अफगानिस्तान के साथ युद्ध में पाकिस्तान की स्थिति पूरी दुनिया देख रही है, वहीं ईरान में चल रहे युद्ध के बाद उसे आंतरिक मुश्किलों का भी सामना करना पड़ रहा है. इसी बीच जरदारी का ये भाषण आ जाता है, जो धमकी कम और नाटक ज्यादा लग रहा है.
क्या था पाकिस्तानी राष्ट्रपति के भाषण में?
- संसद के संयुक्त सत्र में पाकिस्तानी राष्ट्रपति जरदारी ने भारत को लेकर की सैन्य चेतावनियां दीं. उन्होंने कहा – ‘कोई भूल मत करना, हम तुम्हारे लिए तैयार हैं.’ इसके आगे जरदारी ने चेतावनी दी कि अगर भारत ने पाकिस्तान पर फिर से आक्रमण किया, तो उसे कठोर जवाब मिलेगा. पाकिस्तान की ओर से ऐसी गीदड़भभकियां तो आम बात हैं लेकिन इसके बाद जरदारी ने जो पलटी मारी, वो गजब की है.
- अगले ही पल उन्होंने कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा- ‘मेरा संदेश है कि युद्ध के मैदान से हटकर सार्थक बातचीत की मेज पर लौटें, यही क्षेत्रीय सुरक्षा का एकमात्र रास्ता है.’ इसी भाषण में उन्होंने जम्मू-कश्मीर के लोगों के प्रति पाकिस्तान की प्रतिबद्धता भी जताई.
- जरदारी ने अफगानिस्तान को लेकर भी बयान दिया. उन्होंने कहा कि सरहद के उस पार से होने वाले हमलों को लेकर पाकिस्तान के बर्दाश्त की हद पार हो चुकी है. एक बार जरदारी ने अफगान नेतृत्व पर दोहा समझौता का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए दोहराया कि अफगानिस्तान की जमीन से तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और बलोचिस्तान लिबरेशन आर्मी को पनाह मिल रही है.
जरदारी कहना क्या चाहते थे?
भारतीय खुफिया सूत्रों का कहना है कि जरदारी का यह भाषण सिर्फ दिखावटी सख्ती है. इसका उद्देश्य पाकिस्तान के आंतरिक संकट से ध्यान हटाना और घरेलू जनता में राष्ट्रवादी भावनाओं को भड़काना है. पाकिस्तान इस वक्त अफगानिस्तान से लगभग जंग जैसी स्थिति में है. तालिबान की ओर से उसे चुनौती मिल रही है और वो पाकिस्तानी फौज से लेकर संसाधनों तक को निशाना बना रहे हैं. ऐसे में जरदारी का भाषण घरेलू और अंतरराष्ट्रीय छवि सुधारने की रणनीति है, न कि भारत के खिलाफ किसी वास्तविक युद्ध का संकेत. जरदारी का भाषण भारत-पाकिस्तान संबंधों से ज्यादा अपने देश की अवाम को बहलाने की कोशिश है. ये पाकिस्तान के आंतरिक संकट और सुरक्षा चुनौतियों की गहरी झलक भी पेश करता है.
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News18 में इंटरनेशनल डेस्क पर कार्यरत हैं. टीवी पत्रकारिता का भी अनुभव है और इससे पहले Zee Media Ltd. में कार्य किया. डिजिटल वीडियो प्रोडक्शन की जानकारी है. टीवी पत्रकारिता के दौरान कला-साहित्य के साथ-साथ अंतरर…और पढ़ें
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