तेलंगाना के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) वारंगल में धार्मिक स्वतंत्रता और प्रशासनिक दोहरे मानकों को लेकर बड़ा विवाद फैल गया है. विश्व हिंदू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. रविनूतला शशिधर ने संस्थान के डायरेक्टर पर सख्त आरोप लगाते हुए आरोप लगाया है कि वहां नमाज के लिए अलग कमरे और ईसाई संगठनों को सहूलियत दी जाती है, लेकिन मात्र 15 मिनट के हनुमान चालीसा के पाठ को रोका गया. प्रवक्ता ने यह भी दावा किया है कि छात्रों के फोन जब्त कर लिए गए और उन्हें संस्थान से निष्कासन की धमकी दी गई, जिसके बाद उन्होंने डायरेक्टर के तत्काल बर्खास्तगी की मांग की है.
डॉ. शशिधर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए NIT प्रशासन की कार्रवाई को सत्ता तंत्र और पक्षपातपूर्ण बताया है. उन्होंने लिखा है कि जब छात्रों ने अपने मौलिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए हनुमान चालीसा का पाठ करने की कोशिश की तो प्रशासन ने उन पर जबरदस्ती रोक लगा दी. आरोप है कि इस दौरान प्रशासन ने छात्रों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए ताकि वे इस घटना को रिकॉर्ड न कर सकें या किसी से संपर्क न कर सकें. PHD कर रहे शोधार्थियों को उनके सुपरवाइजर के जरिए डराया-धमकाया गया, जबकि अन्य छात्रों को कॉलेज से निकाल दिए जाने की धमकी दी गई. VHP प्रवक्ता ने सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ अल्पसंख्यकों के धार्मिक कार्यक्रमों के लिए व्यवस्था की जाती है, वहीं हिंदू छात्रों के साथ इस तरह का भेदभाव संविधान के अनुच्छेद 25 का उल्लंघन है, जो हर नागरिक को अपना धर्म पालन करने का अधिकार देता है.
NIT वारंगल बना विवाद का केंद्र
विवाद का केंद्र बने NIT वारंगल में पिछले कुछ समय से छात्रों और प्रशासन के बीच तनाव बना हुआ था. यह आरोप नया नहीं है, अक्सर प्रीमियर इंस्टीट्यूट्स में छात्र संघ की गतिविधियों या धार्मिक कार्यक्रमों को लेकर प्रशासन के साथ टकराव होता रहता है. हालांकि, इस बार मामला चुनिंदा सहूलियत देने का आरोप बनकर सामने आया है. छात्र समुदाय में इस बात का गुस्सा है कि अगर एक ही परिसर में सभी धर्मों के लिए समान नियम नहीं होंगे तो यह स्थिति तनाव का कारण बनेगी. सूत्रों का कहना है कि प्रशासन का यह कदम हिंदू छात्रों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है और अगर इस पर जल्द काबू नहीं पाया गया तो इसका विरोध और बढ़ सकता है.
छात्रों के साथ खड़े होने की घोषणा
VHP ने इस पूरे प्रकरण में छात्रों के साथ खड़े होने की घोषणा की है और कहा है कि अगर छात्रों के साथ कोई और छल हुआ तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संस्थान के प्रशासन पर होगी. संगठन ने डायरेक्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई और उनकी तत्काल बर्खास्तगी की मांग की है. अब यह देखना रहेगा कि एनआईटी प्रशासन इन गंभीर आरोपों का जवाब कैसे देता है और क्या वह छात्रों के साथ बताए गए इस ‘कड़वे’ रवैये को लेकर कोई स्पष्टीकरण देता है. फिलहाल, यह मामला शिक्षण संस्थान में धर्मनिरपेक्षता और समानता की बहस को नया मोड़ दे सकता है.
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