पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद अब महिलाओं को लेकर बड़े फैसलों की तैयारी तेज हो गई है। मौजूद जानकारी के अनुसार राज्य सरकार अगले महीने से अन्नपूर्णा भंडार योजना लागू कर सकती है। इसके साथ ही महिलाओं के लिए राज्य परिवहन की बसों में मुफ्त यात्रा सुविधा शुरू करने पर भी तेजी से काम चल रहा है।
बता दें कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की सरकार इस योजना को अपनी प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं में शामिल कर रही है। इसी सिलसिले में नए मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल ने पदभार संभालने के तुरंत बाद नवान्न स्थित राज्य सचिवालय में उच्चस्तरीय बैठक की। इस बैठक में लगभग सभी विभागों के सचिव और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में अन्नपूर्णा भंडार योजना के क्रियान्वयन, लाभार्थियों के सत्यापन और प्रशासनिक तैयारियों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। सरकारी सूत्रों के मुताबिक अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि योजना लागू करने में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। गौरतलब है कि चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने महिलाओं को हर महीने सीधे बैंक खाते में तीन हजार रुपये देने का वादा किया था।
राज्य सरकार की योजना है कि इस आर्थिक सहायता का लाभ केवल पात्र महिलाओं तक पहुंचे। इसी कारण लाभार्थियों का सत्यापन अभियान चलाया जाएगा। मौजूद जानकारी के अनुसार जिन महिलाओं को पहले ममता बनर्जी सरकार की लक्ष्मी भंडार योजना का लाभ मिल रहा था, उनके दस्तावेज, बैंक खाते और पहचान से जुड़ी जानकारी की दोबारा जांच की जाएगी।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी महिला का नाम मतदाता सूची से हट चुका है या उसकी मृत्यु की पुष्टि हो चुकी है, तो उसे नई योजना का लाभ नहीं दिया जाएगा। हालांकि जिन महिलाओं का रिकॉर्ड पहले से सरकारी डाटाबेस में मौजूद है, उन्हें दोबारा आवेदन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें सीधे अन्नपूर्णा भंडार योजना में शामिल किया जा सकता है।
वहीं दूसरी तरफ जिन महिलाओं को अब तक लक्ष्मी भंडार योजना का लाभ नहीं मिला है, उनके लिए अलग से आवेदन प्रक्रिया शुरू की जाएगी। राज्य सरकार जल्द ही पात्रता, आवेदन और लाभ वितरण से जुड़ी विस्तृत अधिसूचना जारी कर सकती है।
बैठक में मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि लाभार्थियों की सूची तैयार करते समय किसी तरह की गड़बड़ी या फर्जीवाड़ा नहीं होना चाहिए। जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को निगरानी बढ़ाने के लिए कहा गया है। साथ ही लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने पर भी जोर दिया गया ताकि योजना को लेकर भ्रम की स्थिति न बने।
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