जाने वॉलेट्स के नए नियम
मासिक बैलेंस की सीमा- किसी भी मोबाइल वॉलेट में मासिक बकाया 2 लाख रुपये से अधिक नहीं हो सकता है।
फंड ट्रांसफर पर ब्रेक- पर्सन-टू-पर्सन (P2P) फंड ट्रांसफर लिमिट घटाकर अब 25 हजार रुपये कर दी गई है।
कैश लोडिंग लिमिट- हर महीने वॉलेट में नकद जमा करने की अधिकतम सीमा 10 हजार रुपये कर दी गई है।
क्या UPI को मिल रहा है फायदा
असल में पॉलिसी कंसेंसस सेंटर (PCC) जैसे उद्योग के प्रतिष्ठित थिंक टैंक ने इस फैलसे पर अपनी गहन चिंता को पेश किया है। 20 मई को आयोजित की गई एक गोलमेज बैठक में फिनटेक कंपनियों, पूर्व बैंकर्स और सलाहकारों ने हिस्सा लिया। इस बैठक में शामिल हुए सभी एक्सपर्ट ने माना है कि इन पाबंदियों से प्रतीत होता है कि रणनीतिक रुप से मोबाइल वॉलेट्स को कमजोर करके बैंकिंग सिस्टम और UPI को ज्यादा तरजीह दी जाती है।
RBI ने क्यों दिखाई सख्ती?
– सट्टेबाजी, गैंबलिंग और रियल-मनी गेमिंग कंपनियां डिजिटल वॉलेट का दुरुपयोग कर रही है।
– ऐसे कई मर्चैंट है जो अपना गलत नाम बताकर या छिपाकर अवैध रुप से ट्रांजेक्शन कर रही है।
– FIU ने असामान्य फ्रीक्वेंसी, आय और खर्च में काफी बड़े अंतर दिखें और भारी-भरकम ट्रांजेक्शन के एक्टिव खाते अचानक से बंद हो गए।
डेटा सार्वजनिक करें RBI- कंपनियों की मांग क्या है
– कंपनियों का कहना है कि चंद लोगों के वजह से पूरी इंडस्ट्री पर प्रतिबंध क्यों लगाया जा रहा है।
– फुल-केवाईसी और मर्चेंट ऑनबोर्डिंग सिस्टम विकसित करने के लिए कंपनियों ने भारी पूंजी खर्च की है। उद्योग से जुड़े एक प्रमुख अधिकारी का कहना है कि हालिया प्रतिबंधों ने डिजिटल वॉलेट कारोबार की लाभ कमाने की संभावनाओं को काफी कमजोर कर दिया है। उनका मानना है कि इस माहौल में कंपनियां वित्तीय समावेशन से जुड़े नए समाधान और सेवाओं पर पैसा लगाने से हिचकिचाएंगी, क्योंकि भविष्य में रिटर्न को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।
ग्राहकों और इंडस्ट्री पर क्या पड़ेगा असर
एक्सपर्ट के मुताबिक, नए नियम के वजह से इसका असर सीधा ग्राहकों और फिनटेक इंडस्ट्री पर असर पड़ेगा। एक तरफ जहां RBI फाइनेंशियल फ्रॉड और अवैध ट्रांजेक्शन को रोकना चाहता है। दूसरी तरफ कंपनियों को यह डर है कि इससे डिजिटल पेमेंट और वित्तीय समावेशन की रफ्तार धीमी हो जाएगी।
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