जैसे-जैसे AI एडवांस होता जा रहा है, वैसे-वैसे इससे जुड़े खतरे भी बढ़ते जा रहे हैं। AI से जुड़े खतरों के बारे में चेतावनी देते हुए 100 से ज्यादा कंपनियां आगे आई हैं। उन्होंने कंपनियों और सरकारों से इन खतरों से सुरक्षित रहने के लिए जरूरी कदम उठाने का आग्रह किया है।
दुनिया के पास बहुत कम समय है
इस पर हस्ताक्षर करने वाली कंपनियों का कहना है कि साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए दुनिया के पास बहुत कम समय है। उन्होंने चेतावनी दी कि जैसे-जैसे AI ज्यादा शक्तिशाली होता जा रहा है, हैकर्स इसका इस्तेमाल ज्यादा एडवांस्ड और बड़े पैमाने पर साइबर हमले करने के लिए कर सकते हैं।
कंपनियों ने कहा कि रोजमर्रा की जिंदगी में जिन जरूरी सिस्टम पर लोग निर्भर रहते हैं, वे खतरे में पड़ सकते हैं। इनमें अस्पताल, वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट और इंटरनेट व अन्य जरूरी सर्विसेज को चालू रखने वाला इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल है। साथ ही, कंपनियों का मानना है कि AI साइबर सिक्योरिटी टीमों के लिए भी एक शक्तिशाली टूल बन सकता है।
ओपन लेटर में कहा गया है कि नए एआई टूल्स सुरक्षा टीमों को सालों से मौजूद कंप्यूटर सिस्टम में कमजोरियों को ढूंढने और उन्हें ठीक करने में मदद कर सकते हैं। इन कमजोरियों में पुराना सॉफ्टवेयर, अनपैच्ड सिस्टम, खराब ऑथेंटिकेशन, गलत कॉन्फिगरेशन, ज्यादा यूजर परमिशन और पुरानी तकनीक शामिल है।
कंपनियों ने कहा कि सुरक्षा टीमों, विशेष रूप से महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की रक्षा करने वाली टीमों के पास अक्सर पर्याप्त लोगों, टूल्स और रिसोर्सेस की कमी होती है। वे अब साइबर डिफेंस में निवेश में बड़ी वृद्धि का आह्वान कर रहे हैं।
मुख्य सुझावों में से एक यह है कि ‘साइबर-कैपेबल AI टूल ज्यादा सुरक्षा करने वालों के हाथों में सौंपे जाएं।’ कंपनियों के अनुसार, AI सिक्योरिटी प्रोफेशनल्स को जरूरी काम तेजी से और कम लागत में करने में मदद कर सकता है। वे यह भी चाहते हैं कि ऑर्गेनाइजेशन सिक्योरिटी टूल्स, जानकारी और सही समाधान शेयर करें, ताकि किसी एक कंपनी द्वारा विकसित समाधान दूसरों की सुरक्षा में मदद कर सके। यह ओपन लेटर हर ऑर्गेनाइजेशन से साइबर सुरक्षा को तुरंत नेतृत्व की प्राथमिकता बनाने का आग्रह करता है।
कंपनियों से आग्रह किया जा रहा है कि वे अपनी सबसे ज्यादा जोखिम वाली सुरक्षा समस्याओं को ठीक करें, चेक करें कि क्या वे समाधान वास्तव में काम करते हैं और उनके द्वारा उपयोग किए जाने वाले सॉफ्टवेयर और एआई-जनरेटेड कोड के लिए सुरक्षा मानकों में सुधार करें।
उनसे ज्यादा मजबूत एक्सेस कंट्रोल, ‘लीस्ट-प्रिविलेज’ सिस्टम और सुरक्षा की कई लेयर्स का इस्तेमाल करने के लिए भी कहा जा रहा है। अगर किसी जरूरी सिस्टम को जरूरी सर्विसेस पर असर डाले बिना पैच नहीं किया जा सकता है, तो ऑर्गेनाइजेशन्स को सुरक्षा के दूसरे उपाय करने चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे काम कर रहे हैं।
साइबर सुरक्षा कंपनियों और टेक्नोलॉजी पार्टनर्स को भी तेजी से एआई पर आधारित हमलों के खिलाफ अपनी सुरक्षा का लगातार परीक्षण करने के लिए कहा गया है। उन्हें महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा ऑपरेटरों के लिए एआई पावर्ड सेफ्टी टूल्स को तैनात करना भी आसान बनाना चाहिए।
सरकारें और AI कंपनियां भी इसमें भूमिका निभाती हैं
हस्ताक्षरकर्ता सरकारों से यह भी मांग कर रहे हैं कि वे साइबर खतरों की जानकारी बेहतर तरीके से शेयर करें और बड़े हमलों पर देशों के बीच मिलकर जवाब दें। सरकारों को अस्पतालों, जल आपूर्ति और स्थानीय सरकारों जैसे संगठनों को धन और बचाव के लिए एआई फीचर्स भी देनी चाहिए, क्योंकि उनके पास साइबर सुरक्षा के कर्मचारी या बजट पर्याप्त नहीं होते।
इस लेटर में एडवांस्ड AI मॉडल बनाने वाली कंपनियों की जिम्मेदारी भी तय की गई है। AI कंपनियों से कहा जा रहा है कि वे उन ऑर्गेनाइजेशन्स को अपने मॉडल का जिम्मेदार तरीके से इस्तेमाल करने की सुविधा, फंडिंग, ट्रेनिंग और प्रैक्टिकल सपोर्ट दें, जिन्हें अपनी साइबर सुरक्षा मजबूत करने के लिए मदद की जरूरत है।
उन्हें यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि AI एजेंट की पहचान का पता लगाया जा सके और वे जवाबदेह हों। साथ ही, उन्हें ऑथराइज्ड सिक्योरिटी टेस्टिंग, मॉनिटरिंग और खतरे के आकलन (थ्रेट असेसमेंट) को शेयर करने में निवेश करना चाहिए। इस पहल से जुड़ी कंपनियों का मानना है कि AI की वजह से डिजिटल दुनिया कम सुरक्षित नहीं होनी चाहिए।
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