हंसलपुर प्लांट डी के साथ, मारुति की कुल विनिर्माण क्षमता 29 लाख इकाई प्रति वर्ष हो गई है। हंसलपुर संयंत्र में कुल निवेश 25,288 करोड़ रुपए है। इसमें प्लांट डी के लिए अनुमानित 3,900 करोड़ रुपए का निवेश शामिल है। नया प्लांट शुरू में कंपनी के प्रमुख बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन, ई-विटारा का उत्पादन करेगा।
हंसलपुर प्लांट डी के साथ, मारुति सुज़ुकी की कुल विनिर्माण क्षमता 29 लाख इकाई प्रति वर्ष हो गई है। हंसलपुर संयंत्र में कुल निवेश 25,288 करोड़ रुपए है। इसमें प्लांट डी के लिए अनुमानित 3,900 करोड़ रुपए का निवेश शामिल है। नया प्लांट शुरू में कंपनी के प्रमुख बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन (बीईवी), ई विटारा का उत्पादन करेगा। यह अत्याधुनिक हंसलपुर संयंत्र फ्रोंक्स, बलेनो, स्विफ्ट और ई-विटारा का उत्पादन करता है। यह संयंत्र कंपनी के लिए एक प्रमुख निर्यात केंद्र के रूप में उभरा है। वित्त वर्ष 2025-26 के कुल निर्यात में इस संयंत्र की लगभग 47% हिस्सेदारी रही।
इस विस्तार पर बात करते हुए, मारुति सुज़ुकी इंडिया लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ, श्री हिसाशी ताकेउचि ने कहा, “मजबूत बुनियादी ढांचे और एक प्रगतिशील औद्योगिक इकोसिस्टम की मदद से गुजरात मारुति सुज़ुकी के लिए एक विनिर्माण और निर्यात केंद्र के रूप में उभरा है। हमारे हंसलपुर संयंत्र के चौथे प्लांट में व्यावसायिक उत्पादन की शुरुआत से इसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता बढ़कर 10 लाख वाहन हो गई है, जिससे यह एक ही स्थान पर भारत में सबसे अधिक संख्या में गाड़ियों का निर्माण करने वाला संयंत्र बन गया है। यह नई लाइन भारत और विदेशों में ग्राहकों की बढ़ती मांग को पूरा करने की हमारी क्षमता को और मजबूत करेगी, साथ ही हमारी ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ की दृष्टि को आगे बढ़ाएगी और हमारे ग्लोबल फुटप्रिंट का विस्तार करेगी।”
उन्होंने आगे कहा, “एक साथ मिलकर, गुजरात में हंसलपुर और आगामी साणंद संयंत्र भारत में सालाना 40 लाख इकाइयों के उत्पादन के हमारे दीर्घकालिक लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। ये परियोजनाएं भारत की विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने, रोजगार पैदा करने, निर्यात को बढ़ावा देने और विकसित भारत में योगदान देने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।”
| मारुति सुज़ुकी मैन्युफैक्चरिंग फुटप्रिंट | |
|---|---|
| प्लांट्स | प्रोडक्शन कैपेसिटी |
| हंसलपुर | 10 लाख यूनिट्स प्रति वर्ष |
| मानेसर | 9 लाख यूनिट्स प्रति वर्ष |
| गुरुग्राम | 5 लाख यूनिट्स प्रति वर्ष |
| खरखौदा | 5 लाख यूनिट्स प्रति वर्ष |
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| गुजरात में मारुति सुज़ुकी के हंसलपुर संयंत्र का अवलोकन | |
| संयंत्र का स्थान | हंसलपुर, गुजरात |
| क्षेत्रफल | एकीकृत सप्लायर्स पार्क के साथ 640 एकड़ |
| कुल निवेश | 25,288.7 करोड़ रुपए |
| उत्पादन क्षमता | 10 लाख यूनिट्स प्रति वर्ष |
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| संचालन की शुरुआत | |
| प्लांट ए | फरवरी 2017 |
| प्लांट बी | जनवरी 2019 |
| प्लांट सी | अप्रैल 2021 |
| प्लांट डी | जुलाई 2026 |
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| वर्तमान उत्पादन मॉडल | |
| प्लांट ए | बलेनो |
| प्लांट बी | फ्रोंक्स और स्विफ्ट |
| प्लांट सी | फ्रोंक्स और ई-विटारा |
| प्लांट डी | ई-विटारा |
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| उत्पादन के माइलस्टोन | |
| संचयी 10 लाख | 21 अक्टूबर 2020 |
| संचयी 20 लाख | 18 अगस्त 2022 |
| संचयी 30 लाख | 4 दिसंबर 2023 |
| संचयी 40 लाख | 4 मार्च 2025 |
| संचयी 50 लाख | 7 मई 2026 |
सस्टेनेबल लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा देने की मारुति सुज़ुकी की प्रतिबद्धता के तहत, कंपनी ने मार्च 2024 में प्रधानमंत्री गतिशक्ति कार्यक्रम के तहत अपने हंसलपुर संयंत्र में भारत की पहली ऑटोमोबाइल इन-प्लांट रेलवे साइडिंग की शुरुआत की। मारुति सुज़ुकी ने मार्च 2023 में शिपमेंट शुरू होने के बाद से अब तक कुल 7.5 लाख से अधिक वाहनों को भेजा है, जिससे कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन, वाहन परिवहन में ईंधन की खपत में काफी कमी आई है और सड़क पर भीड़भाड़ कम हुई है। फरवरी 2026 में, गुजरात इन-प्लांट रेलवे साइडिंग ‘वेरा के वेरीफाइड कार्बन स्टैंडर्ड’ (“वीसीएस”) कार्यक्रम के तहत पंजीकृत होने वाली विश्व की पहली मोडल शिफ्ट ट्रांसपोर्टेशन परियोजना बन गई।
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