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सभी माता-पिता ये चाहते हैं कि उनके बच्चों को पढ़ाई-लिखाई के अच्छे मौके मिलें। अच्छी कोचिंग मिले, ताकि वे बेहतर करियर बना सकें। इसलिए अच्छी कोचिंग ढूंढते हुए पेरेंट्स सिर्फ ये देखते हैं कि कोचिंग का पासिंग और सिलेक्शन रिकॉर्ड कैसा है।
लेकिन इस बीच एक बेहद जरूरी सवाल पीछे छूट जाता है। वो ये कि “जिस कोचिंग बिल्डिंग में बच्चा रोज कई घंटे बिताएगा, वह कितनी सुरक्षित है?”
हाल ही में लखनऊ में एक कोचिंग सेंटर की बिल्डिंग में आग लगने से 15 छात्रों की मौत हो गई। इससे पहले जुलाई, 2024 में दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर स्थित एक कोचिंग में पानी भरने से तीन छात्रों की जान चली गई थी। इन घटनाओं ने दिखाया कि सुरक्षा में छोटी-सी चूक भी बड़ी त्रासदी बन सकती है।
इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में जानेंगे कि अपने बच्चों का कोचिंग में एडमिशन कराने से पहले पेरेंट्स को क्या-क्या चेक करना चाहिए। साथ ही जानेंगे कि-
- पेरेंट्स को कौन-से 10 सवाल जरूर पूछने चाहिए?
- कोचिंग का रजिस्ट्रेशन कैसे चेक कर सकते हैं?
एक्सपर्ट: रुद्र विक्रम सिंह, एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली

सवाल- अगर बच्चे को कोचिंग में एडमिशन दिलवा रहे हैं तो सबसे पहले क्या चेक करें?
जवाब- कोचिंग में एडमिशन से पहले ये चीजें जरूर चेक करें-
- कोचिंग का रजिस्ट्रेशन चेक करें।
- टीचर्स की योग्यता और अनुभव देखें।
- एक बैच में बच्चों की संख्या जानें।
- पढ़ाई, टेस्ट और स्टडी मटेरियल देखें।
- फीस और रिफंड पॉलिसी समझें।
- क्लासरूम और फायर सेफ्टी चेक करें।
- सीसीटीवी और सुरक्षा व्यवस्था देखें।
- काउंसलिंग की सुविधा के बारे में जानें।
- पुराने छात्रों और पेरेंट्स का फीडबैक लें।
सवाल- क्या सिर्फ रिजल्ट देखकर कोचिंग चुनना सही है?
जवाब- नहीं। कई संस्थान सिर्फ चुनिंदा सफल छात्रों को प्रचार में दिखाते हैं, जबकि पूरी तस्वीर अलग होती है। अच्छी कोचिंग वही है, जहां ये चीजें भी बेहतर हों-
- पढ़ाई की क्वालिटी।
- बच्चे पर व्यक्तिगत ध्यान।
- सुरक्षा।
- सीखने का माहौल।
इसलिए रिजल्ट को एक पैमाना मानें, लेकिन सिर्फ उसके आधार पर फैसला न करें।
सवाल- कोचिंग चुनते समय पेरेंट्स क्या कॉमन गलतियां करते हैं?
जवाब- पेरेंट्स की गलतियों का असर बच्चे की पढ़ाई, आत्मविश्वास और मेंटल हेल्थ पर पड़ता है। पेरेंट्स अक्सर ये गलतियां करते हैं-
- सिर्फ रिजल्ट और टॉपर्स देखकर फैसला लेना।
- बच्चे की रुचि और क्षमता को नजरअंदाज करना।
- भीड़ या दूसरे लोगों की देखा-देखी एडमिशन कराना।
- सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान न देना।
- पूरी जानकारी के बिना जल्दबाजी में एडमिशन कराना।
सवाल- बच्चे को एडमिशन दिलाने से पहले पेरेंट्स को कौन-से सवाल पूछने चाहिए?
जवाब- कुछ जरूरी सवाल पूछकर आप कोचिंग की सुरक्षा, जवाबदेही और इमरजेंसी तैयारियों का अंदाजा लगा सकते हैं। ग्राफिक में सभी जरूरी सवाल देखिए-

अब इन सारे सवालों और उनके जवाब को अलग से विस्तार से समझिए-
सवाल- क्या कोचिंग सेंटर की बिल्डिंग में फायर सेफ्टी के सारे इंतजाम हैं?
जवाब- कोचिंग सेंटर की बिल्डिंग में आग जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए ये जरूरी इंतजाम होने चाहिए। जैसे-
- फायर NOC और जरूरी सुरक्षा मानकों का पालन।
- हर मंजिल पर चालू हालत में फायर एक्सटिंग्विशर।
- इमरजेंसी एग्जिट।
- चौड़ी और बाधा रहित सीढ़ियां।
- फायर अलार्म और स्मोक डिटेक्टर।
- इमरजेंसी लाइट और बिजली बैकअप।
- आग लगने पर निकासी की स्पष्ट योजना।
- स्टाफ और छात्रों के लिए समय-समय पर फायर ड्रिल।
सवाल- क्या कोचिंग के पास फायर NOC है?
जवाब- एडमिशन से पहले यह जरूर पता करें कि कोचिंग सेंटर की बिल्डिंग के पास वैध फायर NOC (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) है या नहीं। यह बिल्डिंग के फायर सेफ्टी स्टैंडर्ड्स का प्रूफ होता है। अगर कोचिंग संस्थान यह जानकारी देने से बचे तो सतर्क रहें।
सवाल- फायर NOC वैध है या नहीं, इसे कैसे चेक करें?
जवाब- इसका पता लगाने के लिए ये काम करें-
- कोचिंग मैनेजमेंट से फायर NOC की कॉपी दिखाने के लिए कहें।
- NOC पर एजेंसी का सर्टिफिकेशन, जारी होने की तारीख और वैधता अवधि देखें।
- NOC में लिखा पता कोचिंग के पते से मिलाएं।
- संबंधित राज्य के फायर सर्विस/नगर निगम के ऑनलाइन पोर्टल पर NOC को वेरिफाई करें।
- अगर ऑनलाइन जानकारी उपलब्ध न हो तो फायर डिपार्टमेंट या नगर निकाय से RTI के जरिए जानकारी लें।
सवाल- बिल्डिंग में कितने इमरजेंसी एग्जिट हैं? कितने होने चाहिए?
जवाब- इमरजेंसी एग्जिट की संख्या इमारत के आकार, ऊंचाई और उसमें मौजूद लोगों की संख्या के हिसाब से तय होती है। हालांकि-
- कम-से-कम 2 इमरजेंसी एग्जिट होने चाहिए।
- दोनों एग्जिट अलग-अलग दिशा में होने चाहिए।
- एग्जिट तक जाने का रास्ता खुला और बिना रुकावट का होना चाहिए।
- अगर बिल्डिंग बड़ी है या उसमें ज्यादा लोग रहते हैं तो 2 से ज्यादा एग्जिट होने चाहिए।
सवाल- क्या कोचिंग में नियमित फायर ड्रिल होती है?
जवाब- बच्चे को एडमिशन दिलाने से पहले पता करें कि कोचिंग में नियमित फायर ड्रिल होती है या नहीं।
यह भी सुनिश्चित करें कि छात्रों और स्टाफ को इमरजेंसी सिचुएशन के लिए सेफ एग्जिट का नियमित अभ्यास कराया जाता हो।
सवाल- आग लगने की स्थिति में बच्चों को निकालने की क्या व्यवस्था है?
जवाब- राष्ट्रीय भवन संहिता (NBC) के मुताबिक, हर संस्थान के पास सेफ एग्जिट की स्पष्ट योजना होनी चाहिए।
ये चीजें जरूर चेक करें-
- इमरजेंसी निकासी की लिखित योजना है या नहीं।
- हर मंजिल पर एग्जिट रूट का मैप लगा है या नहीं।
- सभी छात्रों के लिए तय असेंबली प्वॉइंट है या नहीं।
- बच्चों और स्टाफ को नियमित मॉक ड्रिल कराई जाती है या नहीं।
सवाल- बिल्डिंग में कितने फायर एक्सटिंग्विशर हैं? कितने होने चाहिए?
जवाब- फायर एक्सटिंग्विशर की संख्या सभी इमारतों के लिए एक जैसी नहीं होती। यह इमारत के आकार, जरूरत, आग के रिस्क और वहां मौजूद लोगों की संख्या के आधार पर तय की जाती है।
सवाल- क्या धुआं निकलने और अलार्म सिस्टम की व्यवस्था है?
जवाब- एडमिशन से पहले यह जरूर पता करें कि कोचिंग में स्मोक डिटेक्टर और फायर अलार्म सिस्टम लगे हैं या नहीं। अलार्म सिस्टम आग या धुआं होने पर तुरंत अलर्ट देते हैं। इससे समय रहते इमारत खाली कराई जा सकती है और हादसे का रिस्क कम होता है।
सवाल- कोचिंग में बिजली के तारों और उपकरणों की क्या स्थिति है?
जवाब- कई बड़े हादसों में देखा गया है कि आग लगने की वजह खराब बिजली व्यवस्था और सुरक्षा उपकरणों की कमी थी। इसलिए एडमिशन से पहले कोचिंग में ऐसे सभी जरूरी सुरक्षा इंतजाम जरूर चेक कर लें। ग्राफिक में देखिए-

सवाल- एक क्लासरूम में कितने बच्चे होने चाहिए?
जवाब- इसकी कोई तय सीमा नहीं है। हालांकि, कोचिंग सेंटर्स के लिए केंद्र सरकार की गाइडलाइंस (2024) के मुताबिक, हर छात्र के लिए कम-से-कम 1 वर्गमीटर (1 sq. m.) जगह होनी चाहिए और छात्रों की संख्या के हिसाब से पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर होना चाहिए।
सवाल- क्या कोचिंग में फर्स्ट-एड किट मौजूद है?
जवाब- छोटी-मोटी चोट या मेडिकल इमरजेंसी में तुरंत प्राथमिक उपचार देना बेहद जरूरी होता है। इसके लिए पता करें कि-
- कोचिंग सेंटर में फर्स्ट-एड किट उपलब्ध है या नहीं।
- किट में सभी जरूरी सामान और दवाएं मौजूद हैं या नहीं।
- देखें कि उनकी एक्सपायरी डेट क्या है।
- स्टाफ में किसी को प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण मिला है या नहीं।
सवाल- किसी छात्र की तबीयत खराब होने पर कोचिंग का प्रोटोकॉल क्या है?
जवाब- शिक्षा मंत्रालय की 2024 की कोचिंग सेंटर गाइडलाइंस के मुताबिक, कोचिंग में फर्स्ट एड किट और इमरजेंसी मेडिकल हेल्प की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि जरूरत पर तुरंत प्राथमिक उपचार मिल सके। यह भी जांचें कि, मेडिकल इमरजेंसी के लिए हॉस्पिटल या एम्बुलेंस की व्यवस्था है या नहीं।
सवाल- क्या कोचिंग किसी सरकारी अथॉरिटी के पास रजिस्टर्ड है?
जवाब- शिक्षा मंत्रालय की 2024 की कोचिंग सेंटर गाइडलाइंस के मुताबिक, 50 से अधिक छात्रों वाले कोचिंग सेंटर का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। रजिस्टर्ड कोचिंग की जवाबदेही तय होती है और उससे यह उम्मीद की जाती है कि वह तय प्रशासनिक और सुरक्षा मानकों का पालन करेगी।
सवाल- कोचिंग की मान्यता और रजिस्ट्रेशन कैसे चेक करें?
जवाब- कोचिंग सेंटर को स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालय की तरह मान्यता नहीं मिलती। शिक्षा मंत्रालय की 2024 की कोचिंग सेंटर गाइडलाइंस के मुताबिक, कोचिंग के लिए सबसे जरूरी बात उसका सरकारी रजिस्ट्रेशन है। इसके चेक करने के लिए-
- कोचिंग से रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट दिखाने के लिए कहें।
- सर्टिफिकेट पर रजिस्ट्रेशन नंबर जारी करने वाली अथॉरिटी और वैधता देखें।
- संबंधित विभाग की वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन नंबर से वेरिफिकेशन करें।
सवाल- कौन-से 15 संकेत बताते हैं कि कोचिंग सुरक्षित नहीं है?
जवाब- अगर आपको लापरवाही के संकेत नजर आएं, तो वहां बच्चे को एडमिशन दिलाने से पहले दोबारा जरूर सोचें। ग्राफिक में सभी रेड फ्लैग्स देखिए-

करियर की दौड़ में कोई भी सफलता बच्चे की सुरक्षा से बड़ी नहीं हो सकती। एक छोटी-सी लापरवाही जिंदगी भर का पछतावा बन सकती है। इसलिए कोचिंग चुनते समय पढ़ाई के साथ सुरक्षा को भी बराबर महत्व दें और पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही एडमिशन दिलाएं।
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