AI के डर के बीच LIC का उल्टा दांव
LIC ने यह खरीदारी ऐसे समय की थी, जब निवेशक इस बात पर बहस कर रहे थे कि क्या जनरेटिव AI भारत के सॉफ्टवेयर सर्विस के कारोबारी मॉडल को कमजोर करेगा। जून के अंत के बाद से निफ्टी IT इंडेक्स में लगभग 19% की तेजी आई है, जिसने सेक्टर की पिछली नकारात्मक सोच को पूरी तरह से पलट दिया है।
टीसीएस के शेयरों ने दिया 8,306 करोड़
इस लाभ में सबसे बड़ा योगदान TCS का रहा, जहां LIC की हिस्सेदारी के मूल्य में 8,306 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई और यह 48,926 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। वहीं, इंफोसिस में LIC के निवेश का मूल्य 7,213 करोड़ रुपये बढ़कर 51,117 करोड़ रुपये हो गया। HCL टेक्नोलॉजीज में भी LIC की हिस्सेदारी में 5,513 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ, जो अब 26,306 करोड़ रुपये हो गई है।
LIC की खरीदारी की रणनीति
यह बड़ा मुनाफा LIC की उस रणनीति की वजह से मिला, जब उसने जून तिमाही (अप्रैल-जून) के दौरान इन तीनों कंपनियों के शेयरों की जमकर खरीदारी की थी। भारत के सबसे बड़े घरेलू संस्थागत निवेशक LIC ने इस दौरान इंफोसिस के 59.93 लाख, HCL टेक के 46.93 लाख और TCS के 1.45 लाख शेयर खरीदे।
इंफोसिस और TCS LIC के टॉप-10 सबसे बड़े लिस्टेड इक्विटी इन्वेस्टर्स में भी शामिल हैं, इसलिए उनके शेयरों में यह तेजी LIC के पोर्टफोलियो के लिए और भी अहम हो जाती है।
LIC की चुनिंदा खरीदारी और बिक्री
LIC के पोर्टफोलियो से यह भी पता चलता है कि वह पूरे टेक्नोलॉजी सेक्टर में अंधाधुंध खरीदारी नहीं कर रहा था, बल्कि चुनिंदा कंपनियों पर दांव लगा रहा था। तीन बड़ी कंपनियों के अलावा, LIC ने परसिस्टेंट सिस्टम्स के 7.60 लाख और कोफोर्ज के 1.80 लाख शेयर खरीदे। वहीं, उसने विप्रो के 1.40 करोड़, टेक महिंद्रा के 31.54 लाख और ओरेकल के 2.35 लाख शेयर बेच दिए।
कई अन्य कंपनियों जैसे साइएंट, KPIT टेक्नोलॉजीज, L&T टेक्नोलॉजी सर्विसेज, एम्फेसिस आदि में LIC ने अपनी हिस्सेदारी में कोई बदलाव नहीं किया। इससे स्पष्ट है कि LIC ने बड़ी और चुनिंदा निर्यातक कंपनियों को तरजीह दी, जहां उसे जोखिम और संभावित रिटर्न का अनुपात बेहतर लगा।
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