एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर विपक्षी दलों के सामने गठबंधन का प्रस्ताव रखा है। कानपुर की जनसभा में उन्होंने कहा कि राज्य में भाजपा को तीसरी बार सरकार बनाने से रोकने के लिए विपक्षी पार्टियों को साथ आना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संभावित गठबंधन की घोषणा को लेकर पार्टी दो अक्टूबर तक इंतजार करेगी।
उन्होंने कहा, ‘‘हम भी नहीं चाहते कि उत्तर प्रदेश में तीसरी बार भाजपा की सरकार बने। अगर आप भाजपा को फिर से सरकार बनाने से रोकना चाहते हैं, तो आइए और एआईएमआईएम के साथ हाथ मिलाइए।’’
ओवैसी ने बिहार में एआईएमआईएम के प्रस्ताव का भी जिक्र किया और कहा कि उनकी पार्टी ने गठबंधन के तहत छह सीटों पर चुनाव लड़ने की पेशकश की थी, लेकिन इसके बजाय उन पर झूठे आरोप लगाए गए। समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए ओवैसी ने लोगों से पूछा, ‘‘आपके अखिलेश भैया सत्ता में आए तो (उत्तर प्रदेश में) कितने दंगे हुए?’’
इसके बाद उन्होंने 2013 में मुजफ्फरनगर में हुए दंगों का जिक्र किया और कहा कि लगभग 50 हजार लोग अपने घरों और गांवों से विस्थापित हो गए थे।
ओवैसी ने सपा समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के शासन में मुसलमानों की सामाजिक और आर्थिक तथा शैक्षिक समस्याओं का हल नहीं किए जाने और उन्हें समुचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं दिए जाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने मतदाताओं से राज्य में एआईएमआईएम की राजनीतिक उपस्थिति को मजबूत करने का आग्रह करते हुए कहा कि मुसलमानों को उत्तर प्रदेश विधानसभा में एक आवाज की जरूरत है। ओवैसी ने मदरसों को लेकर भाजपा सरकार के कदमों की भी आलोचना की और स्वतंत्रता संग्राम में मुस्लिम धर्मगुरुओं और धार्मिक विद्वानों की भूमिका का जिक्र किया।
उन्होंने कानपुर के मदरसों के इतिहास का हवाला दिया और आरोप लगाया कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान मुस्लिम उलमा ने अंग्रेजों के खिलाफ फतवा जारी किया था।
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