केरल में हाल ही में सत्ता संभालने वाली संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार आगामी 19 जून को अपना पहला बजट पेश करने जा रही है। लेकिन इस बहुप्रतीक्षित बजट से पहले राज्य के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने प्रदेश की चरमराई वित्तीय स्थिति को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान दिया है। राज्य कैबिनेट की अहम बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि उनकी सरकार इस समय बेहद गंभीर वित्तीय बाधाओं और सीमित संसाधनों के बीच अपना पहला बजट तैयार कर रही है।
क्या है केरल का वित्तीय गणित और मुख्यमंत्री की चुनौती?
सतीशन ने स्थिति की गंभीरता को बयां करते हुए यहां तक कह दिया, “वर्तमान वित्तीय परिस्थितियों को देखते हुए विकास योजनाओं के लिए संसाधन जुटाना मेरे सामने किसी चमत्कार करने जैसा असंभव कार्य है।” राज्य विधानसभा में 19 जून को संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार का पहला बजट पेश किए जाने से पहले सतीशन ने कहा कि महत्वाकांक्षी योजनाओं के बावजूद सरकार सीमित वित्तीय संसाधनों के साथ काम कर रही है।
उन्होंने इस वर्ष फरवरी में पूर्ववर्ती वाम सरकार द्वारा पेश किए गए बजट का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘हम कई तरह की बाधाओं और सीमाओं का सामना कर रहे हैं। यह संशोधित बजट है और हमें इन्हीं वास्तविकताओं के भीतर काम करना होगा।’’
पूर्ववर्ती सरकार पर कटाक्ष करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वह ऐसी स्थिति में हैं जहां उन्हें 35,000 करोड़ रुपये की बजट योजना के वित्तपोषण के लिए अतिरिक्त 20,500 करोड़ रुपये जुटाने होंगे। उन्होंने कहा, ‘‘मेरे सामने चमत्कार करने जैसा असंभव कार्य है।’’
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राज्य मंत्रिमंडल की बैठक के बाद यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में एक सवाल के जवाब में सतीशन ने कहा, ‘‘मेरा काम किसी तरह आवश्यक शेष संसाधन जुटाना है। जब तक हम यह राशि नहीं जुटा लेते, तब तक इस वर्ष की नियोजित परियोजनाओं को लागू नहीं कर पाएंगे।’’
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार का विकास संबंधी दृष्टिकोण और नीतिगत रुख पूर्ववर्ती शासन से अलग है तथा बजट में इन्हीं प्राथमिकताओं की झलक मिलेगी।
पूर्ववर्ती सरकार से अलग होगा यूडीएफ का ‘विजन’
गंभीर आर्थिक तंगी के बावजूद, मुख्यमंत्री सतीशन ने राज्य की जनता को भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार का विकास संबंधी दृष्टिकोण और नीतिगत रुख पूर्ववर्ती वामपंथी शासन से पूरी तरह अलग है।
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उन्होंने जोर देकर कहा कि 19 जून को विधानसभा में पेश होने वाले इस संशोधित बजट में यूडीएफ सरकार की अपनी प्राथमिकताओं, दूरदर्शिता और लोक-कल्याणकारी नीतियों की स्पष्ट झलक देखने को मिलेगी। हालांकि, अब पूरी राजनीतिक और आर्थिक बिरादरी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मुख्यमंत्री सतीशन इस वित्तीय संकट से उबरने और अतिरिक्त संसाधन जुटाने के लिए बजट में कौन से कड़े या नए कदम उठाते हैं।
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