फिनग्रोथ मीडिया के फाउंडर कानन बहल ने दुबई की 36 लाख की टैक्स-फ्री नौकरी ठुकरा दी। देश और परिवार के लिए लिया गया उनका यह फैसला आज हर भारतीय युवा के लिए एक मिसाल है।
एक तरफ दुबई की चकाचौंध और भारी भरकम पैकेज था तो दूसरी तरफ अपने देश में संघर्ष। कानन बहल याद करते हुए बताते हैं कि अगर वो उस वक्त दुबई चले जाते तो अपने सारे खर्चे निकालकर भी हर साल आराम से 20 लाख रुपये बचा सकते थे। इस शानदार ऑफर के मुकाबले उस वक्त भारत में उन्हें कोई भी कंपनी 12 लाख रुपये सालाना से ज्यादा देने को तैयार नहीं थी। सैलरी में जमीन-आसमान का फर्क था। किसी भी आम इंसान का दिमाग इतने बड़े अंतर को देखकर डगमगा सकता है। लेकिन कानन ने एक ऐसा फैसला लिया जिसने उनके करियर की दिशा ही बदल दी।
जब पैसों से ऊपर रखा अपना परिवार और कल्चर
उन्होंने दुबई का वो शानदार ऑफर ठुकरा दिया। इतने बड़े पैकेज को ना कहना कोई आसान काम नहीं था। इस फैसले के पीछे की वजह बताते हुए कानन कहते हैं, “मैंने उस ऑफर को रिजेक्ट कर दिया। मेरे लिए अपने परिवार के करीब रहना और अपने कल्चर से जुड़े रहना पैसों से कहीं ज्यादा मायने रखता था।”
आज जब वो अपने उस फैसले पर पीछे मुड़कर देखते हैं, तो उन्हें जरा सा भी पछतावा नहीं होता। कानन ने साफ लफ्जों में लिखा, “आज 7 साल बाद- मुझे अपने उस फैसले पर रत्ती भर भी अफसोस नहीं है।” उन्होंने खुशी जताते हुए कहा कि भारत में रहकर उन्होंने जो करियर बनाया और जो मुकाम हासिल किया, वो उस मौके से कहीं ज्यादा फायदेमंद और शानदार साबित हुआ जो उन्हें दुबई में मिल सकता था। आज वो खुद की कंपनी चला रहे हैं और सफलता की नई कहानियां लिख रहे हैं।
अपनी इस पोस्ट में कानन ने सिर्फ करियर की बात नहीं की, बल्कि हिंदुस्तान के साथ अपने गहरे जज्बाती रिश्ते का भी जिक्र किया। उन्होंने बहुत ही बेबाकी से कहा, “हो सकता है कि हमारा भारत एकदम परफेक्ट न हो, लेकिन इसे परफेक्ट बनाने की जिम्मेदारी भी तो हमारी ही है।”
इसके साथ ही उन्होंने अपने परिवार के इतिहास के पन्ने भी पलटे। उन्होंने बताया कि कैसे 1947 के बंटवारे के वक्त उनके पूर्वजों को अपना घर-बार छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था और उस मुश्किल वक्त में इसी देश ने उन्हें पनाह दी थी। आजादी के जश्न के मौके पर उन्होंने लिखा, “हम सब अपने स्वतंत्रता सेनानियों और अपनी मातृभूमि भारत के बहुत कर्जदार हैं। हैप्पी इंडिपेंडेंस डे! जय हिंद!”
सोशल मीडिया पर लोगों ने किया सलाम
जैसे ही कानन की यह कहानी सोशल मीडिया पर आई, यह तेजी से वायरल होने लगी। लोगों ने पैसों से ऊपर अपने देश और परिवार को रखने के उनके जज्बे को जमकर सराहा। इंटरनेट पर लोग उनके इस फैसले की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, “यह बहुत ही शानदार बात है। मुझे भारत की तरक्की पर कोई शक नहीं है। जब हमारे पास आप जैसे युवा हैं, तो यह मुमकिन होकर रहेगा। आपके माता-पिता को भी सलाम।” एक और यूजर ने उनकी बात का समर्थन करते हुए कहा, “बिल्कुल सही कहा: भारत भले ही परफेक्ट न हो, लेकिन हमें इसे बनाना होगा। मैं देख रहा हूं कि आप इस दिशा में कोशिश कर रहे हैं।”
दिलचस्प बात यह रही कि कानन की इस पोस्ट ने कई और लोगों को भी अपनी कहानी सुनाने के लिए प्रेरित किया। एक अन्य यूजर ने अपनी पुरानी यादें ताजा करते हुए लिखा, “बहुत खूब! आज से 19 साल पहले मैंने भी दुबई में 60 लाख प्लस इन्सेंटिव वाली नौकरी ठुकरा दी थी। ऐसा होता है। यह कोई बहुत बड़ी बात नहीं है। अगर चीजें गलत भी हो जाएं, तो कभी पछताना मत, क्योंकि तुमने यह फैसला सही वजहों से लिया था। इस बात को हमेशा याद रखना।” एक और शख्स ने उनके देशभक्ति के जज्बे को सलाम करते हुए लिखा, “हर कोई आप जैसा देशभक्त नहीं होता। मैं उन लोगों का भी अनादर नहीं करता जो अपने परिवार के अच्छे भविष्य के लिए विदेश जाते हैं, लेकिन अपने देश को खुद से ऊपर रखने के लिए मेरे दिल में आपके लिए इज्जत कहीं ज्यादा बढ़ गई है।”
वहीं एक यूजर ने जिंदगी की असल अहमियत समझाते हुए लिखा, “पैसा ही जिंदगी में सब कुछ नहीं होता; माता-पिता और परिवार के साथ बिताए गए खुशी के छोटे-छोटे पल, किसी विदेशी धरती पर दोयम दर्जे के नागरिक की जिंदगी जीने से कहीं ज्यादा कीमती होते हैं।” बता दें कानन बहल की यह कहानी इस बात का जीता-जागता सबूत है कि कामयाबी सिर्फ भारी पैकेज में नहीं नापी जाती, बल्कि सुकून, अपनों का साथ और अपनी जड़ों से जुड़े रहने का अहसास भी जिंदगी में बहुत बड़ा मायने रखता है।
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