अमेरिका ने बुधवार को नेवादा में जमीन के नीचे हाई-एक्सप्लोसिव टेस्ट किया। इसमें परमाणु हथियार का इस्तेमाल नहीं हुआ। इस प्रयोग का मकसद ऐसी तकनीक को बेहतर बनाना है, जिससे कम ताकत वाले या छिपाकर किए गए परमाणु विस्फोट का भी पता लगाया जा सके। अमेरिका ने साल 2020 में चीन पर गुप्त परमाणु परीक्षण करने का आरोप लगाया था। नेवादा नेशनल सिक्योरिटी साइट पर परीक्षण किया अमेरिकी ऊर्जा विभाग के तहत काम करने वाली नेशनल न्यूक्लियर सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन (NNSA) ने नेवादा नेशनल सिक्योरिटी साइट के P-टनल क्षेत्र में यह परीक्षण किया। इसमें शक्तिशाली रासायनिक विस्फोटक और विशेष ट्रेसर सामग्री का इस्तेमाल किया गया। वैज्ञानिक इस टेस्ट से मिले आंकड़ों का उपयोग उन सिस्टम और कंप्यूटर मॉडल को बेहतर बनाने में करेंगे, जिनकी मदद से दुनिया में कहीं भी होने वाले परमाणु विस्फोटों का पता लगाया जाता है। परमाणु हथियार का परीक्षण नहीं था अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह परमाणु हथियार का परीक्षण नहीं था। इसका उद्देश्य केवल परमाणु विस्फोटों की पहचान करने वाली तकनीक और निगरानी क्षमता को मजबूत करना था, ताकि भविष्य में किसी भी संदिग्ध परमाणु गतिविधि का जल्दी पता लगाया जा सके। छोटे या छिपे हुए धमाकों का पता लगाना मुश्किल आमतौर पर परमाणु विस्फोट से जमीन में तेज कंपन पैदा होता है, जिससे उसकी पहचान हो जाती है। लेकिन कुछ परीक्षण ऐसे तरीके से किए जा सकते हैं कि कंपन कम महसूस हो। इससे निगरानी सिस्टम के लिए विस्फोट पकड़ना मुश्किल हो सकता है। अमेरिका का कहना है कि वह ऐसी तकनीक विकसित करना चाहता है, जिससे इस तरह के संभावित गुप्त परीक्षणों का भी पता लगाया जा सके। चीन को लेकर पहले भी उठ चुके हैं सवाल अमेरिका पहले चीन पर जून 2020 में गुप्त परमाणु परीक्षण करने का आरोप लगा चुका है। अमेरिकी अधिकारियों का दावा था कि परीक्षण इस तरह किया गया था कि उसकी पहचान करना मुश्किल हो। हालांकि चीन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें पूरी तरह निराधार बताया था। ——————— ये खबर भी पढ़ें… जिनपिंग के बॉडीगार्ड की पहचान उजागर:व्हाइट हाउस की गेस्ट लिस्ट में नाम-पद सामने आया चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ कई साल से एक अधिकारी विदेश दौरों और बड़ी बैठकों में नजर आता रहा है। वह कभी शी के पीछे खड़ा दिखा तो कभी उनके साथ मीटिंग में बैठा नजर आया। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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