हम आपको बता दें कि स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टाक स्थित लेक लुसर्न के किनारे बने एक ऑलीशान रिसोर्ट में अमेरिका और ईरान के बीच उच्चस्तरीय वार्ता चल रही है। इसी दौरान जेडी वेंस ने आसिम मुनीर की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि पिछले तीन महीनों में उन्होंने जितनी बातचीत किसी अन्य व्यक्ति से नहीं की, उससे अधिक बातचीत आसिम मुनीर से हुई है। वेंस ने कहा कि अगर मुनीर की कूटनीतिक समझ और नेतृत्व नहीं होता तो यह वार्ता संभव नहीं हो पाती। उन्होंने मुनीर को एक महान सैन्य नेता के साथ-साथ कुशल राजनयिक भी बताया।
यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका और ईरान के बीच कई महीनों से तनाव बना हुआ था। हाल ही में दोनों देशों के बीच एक अंतरिम समझौता हुआ था, जिसके बाद अब औपचारिक वार्ता शुरू की गई है। अमेरिका की ओर से जेडी वेंस के नेतृत्व में विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर शामिल हैं, जबकि ईरान की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अराघची और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर घालीबाफ प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वार्ता का मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर समाधान निकालना, युद्ध जैसी स्थिति को समाप्त करना और होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला बनाए रखना है।
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जेडी वेंस ने इस बैठक को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच इतने उच्च स्तर की वार्ता पहले कभी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दोनों देश मध्य पूर्व में स्थायी शांति स्थापित कर सकते हैं या फिर पुराने टकराव वाले दौर में लौट जाएंगे। वेंस ने यह भी कहा कि अमेरिका कूटनीति के जरिये मध्य पूर्व की अस्थिरता को समाप्त करना चाहता है ताकि क्षेत्र में शांति कायम हो और तेल आपूर्ति निर्बाध बनी रहे।
हालांकि जेडी वेंस का बयान केवल अमेरिका-ईरान वार्ता तक सीमित नहीं रहा। उनके बयान को भारत और पाकिस्तान के बीच संतुलन साधने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। दरअसल, कुछ दिन पहले ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच फ्रांस में जी-7 सम्मेलन के दौरान मुलाकात हुई थी। करीब सोलह महीनों बाद हुई इस मुलाकात का उद्देश्य दोनों देशों के संबंधों को फिर से मजबूत करना माना गया। पिछले कुछ समय से अमेरिका और भारत के रिश्तों में तनाव देखा गया था। इसकी एक वजह ट्रंप प्रशासन की ओर से लगाए गए शुल्क और रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत की स्वतंत्र विदेश नीति भी रही।
इसके अलावा ऑपरेशन सिंदूर को लेकर अमेरिकी नेताओं की कुछ टिप्पणियों को भारत में अनावश्यक माना गया था। ऐसे माहौल में ट्रंप और मोदी की मुलाकात को रिश्तों में नई शुरुआत के तौर पर देखा गया। ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी की जमकर तारीफ करते हुए उन्हें मजबूत नेता और दुनिया के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक बताया था।
इसी पृष्ठभूमि में जेडी वेंस का पाकिस्तान सेना प्रमुख आसिम मुनीर की प्रशंसा करना काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि अमेरिका एक ओर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी मजबूत करना चाहता है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय सुरक्षा और ईरान संकट जैसे मुद्दों पर पाकिस्तान के साथ अपने संबंध भी बनाए रखना चाहता है।
देखा जाये तो पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तान ने खुद को अमेरिका और ईरान के बीच संवाद स्थापित कराने वाले देश के रूप में पेश करने की कोशिश की है। अप्रैल में हुई पहली अमेरिका-ईरान शांति वार्ता, जो 21 घंटे बाद विफल हो गई थी, उस दौरान भी जेडी वेंस ने पाकिस्तान की भूमिका की सराहना की थी। उन्होंने तब शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर को शानदार मेजबान और कुशल राजनेता बताया था। वेंस ने यह भी कहा था कि वार्ता की विफलता के लिए पाकिस्तान जिम्मेदार नहीं था, बल्कि अमेरिका और ईरान के बीच दशकों पुराने अविश्वास ने बातचीत को पटरी से उतार दिया।
बहरला, ताजा बयान के बाद यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि ट्रंप प्रशासन भारत के साथ संबंध सुधारने की कोशिशों के साथ-साथ पाकिस्तान की सैन्य नेतृत्व को भी क्षेत्रीय कूटनीति में महत्वपूर्ण मान रहा है। जेडी वेंस की टिप्पणियों ने यह दिखा दिया है कि दक्षिण एशिया की राजनीति और मध्य पूर्व की कूटनीति में पाकिस्तान अब भी अमेरिका के लिए एक अहम साझेदार बना हुआ है।
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