इस तस्करी में अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का हाथ था और इसका उद्देश्य बाबरी मस्जिद विध्वंस का बदला लेना था।
विशेष लोक अभियोजक तुषार गोकानी ने बताया कि आतंकवादी और विघटनकारी गतिविधियां रोकथाम (टाडा) अधिनियम की विशेष अदालत के न्यायाधीश आर.पी. मोगेरा ने 12 आरोपियों को दोषी ठहराया और उनमें से 10 को पांच साल के कठोर कारावास और दो को सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
यह मामला दाऊद इब्राहिम तथा दुबई और पाकिस्तान में स्थित उसके सहयोगियों द्वारा रची गई एक साजिश से संबंधित है, जिसका उद्देश्य अयोध्या में छह दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस का बदला लेने के लिए समुद्र के रास्ते आरडीएक्स समेत बड़ी मात्रा में हथियारों और विस्फोटकों की तस्करी करके उन्हें भारत में लाना था।
गोकानी ने बताया कि जुलाई 1993 में जामनगर बी-डिवीजन पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी और यह फैसला कई दशकों तक चली जांच के बाद आया है।
दाऊद इब्राहिम समेत आरोपियों पर टाडा अधिनियम, भारतीय दंड संहिता, शस्त्र अधिनियम और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
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इस मामले की जांच 1993 से 2018 तक चली, जिसमें कुल 46 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और दाऊद इब्राहिम, टाइगर मेमन और अनीस इब्राहिम समेत 15 अन्य को फरार घोषित किया गया। मामले में 46 आरोपियों के खिलाफ सात अलग-अलग आरोपपत्र दाखिल किए गए थे।
गोकानी ने बताया कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान 11 आरोपियों की मौत हो गई और छह को उच्चतम न्यायालय ने बरी कर दिया, जबकि शेष 29 में से 12 को सोमवार को जामनगर की विशेष अदालत ने दोषी ठहराया और 17 अन्य को बरी कर दिया।
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गोकानी ने कहा कि अभियोजन पक्ष दाऊद इब्राहिम के दुबई स्थित आवास पर साजिश रचने और पाकिस्तान की मदद से उसे अंजाम देने से संबंधित सभी तथ्यों को साबित करने में सफल रहा।
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