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‘जमैकन ग्लीनर’ अखबार में रविवार को प्रकाशित एक लेख में जयशंकर ने यह भी कहा कि दोनों देशों को ‘‘एक गहरी और अधिक लचीली साझेदारी बनाने के लिए मिलकर काम करना जारी रखना चाहिए जो दोनों देशों के लोगों के लिए काम करे और एक अधिक न्यायपूर्ण विश्व के निर्माण में योगदान दे’’।
भारत और जमैका के बीच द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जयशंकर शनिवार को कैरेबियाई देश की अपनी पहली यात्रा पर पहुंचे।
उन्होंने कहा कि भारतीय प्रवासी समुदाय का जमैका के साथ 180 वर्षों से संबंध है। उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय प्रवासी समुदाय का यही रिश्ता हमारे संबंधों को एक विशेष रंग प्रदान करता है’’
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उन्होंने बताया कि कई भारतीयों के लिए जमैका का नाम सुनते ही माइकल होल्डिंग और क्रिस गेल का क्रिकेट, बॉब मार्ले और जिमी क्लिफ का संगीत, उसेन बोल्ट और एलेन थॉम्पसन-हेराह का एथलेटिक्स तथा सांस्कृतिक हस्ती मिस लू के लेखन की याद आ जाती है।
जयशंकर ने कहा कि ये संबंध ‘‘दोनों देशों के बीच गहरे जुड़ाव को दर्शाते हैं, जिसमें ‘ग्लोबल साउथ’ और राष्ट्रमंडल की सदस्यता शामिल है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘भारत और जमैका दोनों बहुलवादी समाज, राजनीतिक लोकतंत्र और बाजार आधारित अर्थव्यवस्थाएं हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह रिश्ता अंततः निरंतरता और परिवर्तन की एक कहानी है, जो एक साझा अतीत में निहित है, वर्तमान सहयोग से प्रगाढ़ हो रहा है और भविष्य में अधिक संभावनाओं की ओर उन्मुख है।’’
भारत और जमैका के संबंधों की कहानी 19वीं और 20वीं शताब्दी के आरंभिक वर्षों में भारतीय गिरमिटिया श्रमिकों की इस भूमि की यात्रा से शुरू हुई।
उन्होंने कहा कि 1845 में ‘ब्लंडेल हंटर’ जहाज पर सवार होकर भारतीयों का पहली बार ‘ओल्ड हार्बर बे’ में उतरना इस यात्रा की शुरुआत थी।
उन्होंने कहा, ‘‘आज, लगभग 70,000 भारतीय मूल के लोगों का एक समुदाय दोनों देशों के बीच एक जीवंत सेतु का काम करता है।’’
जयशंकर ने कहा, ‘‘भारतीय-जमैका समुदाय एक सक्रिय और गतिशील शक्ति है जो दोनों देशों के संबंधों को आधार प्रदान करती है और आगे बढ़ाती है। जब दोनों देशों के बीच 1962 में राजनयिक संबंध स्थापित हुए तो हमने उस चीज को औपचारिक रूप दिया जिसकी नींव दोनों देशों के लोग पहले ही डाल चुके थे।’’
रविवार को उन्होंने ओल्ड हार्बर का दौरा किया, जहां 180 साल से भी पहले भारतीय पहली बार जमैका पहुंचे थे। उन्होंने कहा, ‘‘उनका (भारतीयों का) योगदान जमैका के सामाजिक और आर्थिक जीवन को लगातार आकार दे रहा है, हमारे समाजों को उस तरह से जोड़ रहा है जो केवल कूटनीति से संभव नहीं है। इसी कारण मैंने ‘ओल्ड हार्बर बे’ का दौरा करने और भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों से बातचीत का निश्चय किया।’’
उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘180 साल पहले जमैका में पहली बार भारतीयों के आगमन के ऐतिहासिक स्थल ‘ओल्ड हार्बर’ का दौरा करके बहुत खुशी हुई। भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों से बातचीत की और देखा कि उन्होंने अपनी संस्कृति, परंपराओं और पहचान को कैसे संरक्षित रखा है। मंत्रियों ओलिविया अटाविया बेब्सी ग्रेंज और एडमंड बार्टलेट की गरिमामय उपस्थिति के लिए धन्यवाद।’’
मंत्री ने इस बात का भी जिक्र किया कि किस प्रकार भारतीय प्रभाव जमैका के जीवन में समाहित हो गया है, जिसमें करी और रोटी से लेकर दिवाली, फगवा और होसे जैसे त्योहारों को मनाना शामिल है।
मंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार 10 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया है। उन्होंने कहा कि फार्मास्यूटिकल्स, परिधान, इंजीनियरिंग सामान, ऑटोमोबाइल पार्ट्स और डिजिटल प्रौद्योगिकियों में भारत की क्षमता कैरिबियाई देश में साजो सामान और संपर्क केंद्र के रूप में उभरने की जमैका की आकांक्षाओं को पूरा करती है।
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