सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा 28 अप्रैल को जारी डेटा के मुताबिक, यह गिरावट मुख्य रूप से विनिर्माण (Manufacturing) और बिजली (Electricity) उत्पादन के क्षेत्र में सुस्ती के चलते आई है.
सेक्टरवार कैसा रहा परफॉर्मेंस?
मैन्युफैक्चरिंग- देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का ग्रोथ रेट फरवरी के 5.9 परसेंट से गिरकर मार्च में 4.3 परसेंट पर आ गई.
बिजली- मार्च के महीने में बिजली उत्पादन में भी गिरावट देखी गई, जो फरवरी में 2.3 परसेंट से घटकर मार्च में सिर्फ 0.8 परसेंट पर आ गई.
खनन- मार्च के दौरान इस क्षेत्र में सुधार हुआ और यह 5.5 परसेंट की दर से आगे बढ़ा.
क्यों आई गिरावट?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के चलते ऊर्जा की कीमतों में हुई बढ़ोतरी और इससे इनपुट कॉस्ट में हुए इजाफे का असर औद्योगिक उत्पादन पर पड़ा है.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, Crisil में प्रिंसिपल इकोनॉमिस्ट दीप्ति देशपांडे ने कहा, मार्च के आंकड़े पश्चिम एशियाई संघर्ष के कारण लगे झटके के केवल एक हिस्से को ही दर्शाते हैं क्योंकि अनिश्चितता और उत्पादकों के कमजोर मनोबल का असर उत्पादन आंकड़ों में अभी पूरी तरह से सामने आना बाकी है.
CareEdge की चीफ इकोनॉमिस्ट रजनी सिन्हा का भी कुछ ऐसा ही कहना है. वह कहती हैं कि वैश्विक स्तर पर बने हुए जोखिम और सप्लाई चेन में रुकावटों से जुड़ी चिंताओं के कारण भारत की कुल औद्योगिक गतिविधियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.
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