देश में बिजली की अधिकतम मांग बढ़ते तापमान के कारण कूलर और एयर कंडीशनर जैसे शीतलन उपकरणों के अधिक इस्तेमाल के मद्देनजर बृहस्पतिवार को इस मौसम में सर्वाधिक स्तर 240 गीगावाट के पार पहुंच गई।
देश में पूरी की गई अधिकतम बिजली मांग (एक दिन में सबसे अधिक आपूर्ति) 23 अप्रैल को 240.12 गीगावाट दर्ज की गई, जो 22 अप्रैल के 239.70 गीगावाट से थोड़ी अधिक है और इस मौसम की सर्वाधिक है।
विशेषज्ञों के अनुसार, देश में तापमान बढ़ने और लू के कारण अधिकतम बिजली मांग जल्द ही सितंबर 2023 में दर्ज 243.27 गीगावाट के दूसरे सबसे ऊंचे स्तर को पार कर सकती है।
मई 2024 में अधिकतम बिजली मांग लगभग 250 गीगावाट के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई थी। इससे पहले सितंबर 2023 में 243.27 गीगावाट का रिकॉर्ड दर्ज किया गया था।
पिछले वर्ष बिजली की अधिकतम मांग जून में 242.77 गीगावाट दर्ज की गई थी।
आंकड़ों के अनुसार, इस महीने के पहले पखवाड़े में अधिकतम बिजली मांग अपेक्षाकृत कम रही और यह पिछले वर्ष अप्रैल के औसत 235.32 गीगावाट से नीचे बनी रही। इस वर्ष 16 अप्रैल को अधिकतम पूरी की गई बिजली मांग 234.81 गीगावाट दर्ज की गई थी जबकि अगले दिन यह बढ़कर 238.94 गीगावाट हो गई।
18 अप्रैल को मांग लगभग इसी स्तर पर 238.80 गीगावाट रही लेकिन 19 अप्रैल को घटकर 225.69 गीगावाट हो गई। इसके बाद 20 अप्रैल को फिर बढ़कर 237.43 गीगावाट पहुंच गई। 21 अप्रैल को यह घटकर 236.73 गीगावाट रह गई थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि देश में तापमान बढ़ने के साथ बिजली की मांग और खपत और बढ़ेगी क्योंकि घरेलू एवं व्यावसायिक उपभोक्ताओं द्वारा एयर कंडीशनर, एयर कूलर तथा अन्य उपकरणों का उपयोग अधिक होगा।
भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, अगले चार-पांच दिन उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत के अधिकतर हिस्सों में लू चलने के आसार हैं।
पिछली गर्मियों (अप्रैल 2025 के बाद से) के दौरान जून में अधिकतम बिजली मांग 242.77 गीगावाट तक पहुंची थी। हालांकि यह सरकार के 277 गीगावाट के अनुमान से कम थी।
विद्युत मंत्रालय ने इस वर्ष गर्मियों के दौरान अधिकतम बिजली मांग के करीब 270 गीगावाट रहने का अनुमान लगाया है।
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