यह कहानी है IIT हैदराबाद के पूर्व छात्र विवेकानंद पासम की, जिन्हें कॉलेज प्लेसमेंट में Amazon से नौकरी का ऑफर मिला, लेकिन उन्होंने UPSC की तैयारी के लिए इसे छोड़ दिया। करीब चार साल तक सिविल सेवा की तैयारी की, लेकिन नाकाम रहे। इसके बाद उन्होंने SSC CGL पास कर कस्टम्स इंस्पेक्टर की नौकरी हासिल की।
IIT हैदराबाद से BTech, Amazon से मिला था नौकरी का ऑफर
एनडीटीवी में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, विवेकानंद पासम ने साल 2021 में IIT हैदराबाद से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में BTech की पढ़ाई पूरी की। कैंपस प्लेसमेंट के दौरान उन्हें अमेजन में सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट इंजीनियर के पद पर नौकरी का ऑफर मिला था। हालांकि, उन्होंने यह नौकरी ज्वाइन नहीं की। यहां से उन्होंने यूपीएससी का रुख किया और तैयारी शुरू कर दी।
दरअसल, विवेकानंद की रुचि शासन व्यवस्था, अर्थशास्त्र और सार्वजनिक नीति जैसे क्षेत्रों में थी। इसी वजह से उन्होंने कॉरपोरेट करियर के बजाय सिविल सेवा को अपना लक्ष्य बनाया।
चार साल UPSC की तैयारी
विवेकानंद ने करीब चार साल तक UPSC की तैयारी की। उन्होंने 2022, 2023 और 2025 में सिविल सेवा परीक्षा में हिस्सा लिया। खास बात यह रही कि उन्होंने तीनों प्रयासों में UPSC Prelims परीक्षा पास की, लेकिन वह आगे नहीं बढ़ पाएं। हालांकि, उन्होंने असफलता को अपने करियर की आखिरी मंजिल नहीं माना और ना ही हार मानीं। इसके बाद उन्होंने SSC कंबाइड ग्रेजुएट लेवल यानी SSC CGL परीक्षा पास की और सितंबर 2025 में उनका चयन कस्टम्स इंस्पेक्टर के पद पर हुआ।
UPSC के बाद मैनेजमेंट की ओर किया रुख
इसके बाद विवेकानंद ने करियर को एक नई दिशा देने का फैसला किया और मैनेजमेंट की पढ़ाई की ओर बढ़े। रिपोर्ट के मुताबिक, CAT 2025 की तैयारी के लिए उनके पास करीब 45 दिन का ही समय था। इतने कम समय में तैयारी करने के बावजूद उन्होंने परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए 99.92 पर्सेंटाइल हासिल की।
उनकी मेहनत का नतीजा यह रहा कि उन्होंने देश के सभी सात टॉप IIM में एडमिशन के लिए जगह बनाई। आखिरकार उन्होंने IIM अहमदाबाद को चुना और 2026-28 के कार्यक्रम में दाखिला लिया।
‘टॉप IIM में जाना पहुंच से बाहर लगता था’
विवेकानंद ने LinkedIn पर अपनी उपलब्धि साझा करते हुए बताया कि करीब छह महीने पहले जब उन्होंने B-School इंटरव्यू की तैयारी शुरू की थी, तब उन्हें वास्तव में लगता था कि देश के टॉप IIM में एडमिशन हासिल करना उनकी पहुंच से बाहर है। लेकिन लगातार प्रयास और सही दिशा में मेहनत ने उनकी सोच बदल दी। विवेकानंद पासम का सफर उन छात्रों और युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो किसी परीक्षा में असफल होने के बाद खुद को कमजोर समझने लगते हैं।
डिस्क्लेमर: इस कहानी में किए गए सभी दावे और विचार संबंधित व्यक्ति के निजी अनुभव हैं। ‘लाइव हिंदुस्तान’ वेबसाइट सोशल मीडिया पोस्ट पर किए गए इन दावों की पुष्टि नहीं करती है।
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