ऐसे में कुछ उम्मीदवारों की सफलता की कहानी न सिर्फ प्रेरणा देती है, बल्कि यह भी बताती है कि मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी IAS अधिकारी सौम्या शर्मा की है।
दिल्ली की रहने वाली हैं सौम्या शर्मा
सौम्या शर्मा मूल रूप से दिल्ली की रहने वाली हैं और उनकी शुरुआती पढ़ाई भी दिल्ली में ही हुई। उनके माता-पिता अशोक शर्मा और लीना शर्मा पेशे से डॉक्टर हैं। घर में पढ़ाई का अच्छा माहौल होने के कारण सौम्या को शुरुआत से ही शिक्षा के प्रति प्रोत्साहन मिला। उन्होंने स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद नेशनल लॉ स्कूल से कानून की पढ़ाई की। लॉ की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने सिविल सेवा में जाने का मन बना लिया था। इसके बाद उन्होंने UPSC परीक्षा की तैयारी शुरू की और अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरी मेहनत से जुट गईं।
16 साल की उम्र में खो दी सुनने की क्षमता
सौम्या शर्मा की लाइफ में एक बड़ा मोड़ तब आया, जब महज 16 साल की उम्र में उन्होंने अपनी सुनने की क्षमता खो दी। इतनी कम उम्र में इस तरह की चुनौती का सामना करना किसी के लिए भी आसान नहीं होता। हालांकि, सौम्या ने इस परिस्थिति को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने अपने सपने को जिंदा रखा और आगे बढ़ने का फैसला किया। सुनने की क्षमता खोने के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और बाद में UPSC जैसी कठिन परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर यह साबित किया कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, मजबूत इच्छाशक्ति से लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
सिर्फ चार महीने की तैयारी में UPSC क्रैक
सौम्या शर्मा ने वर्ष 2017 में UPSC सिविल सेवा परीक्षा देने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने करीब चार महीने तक परीक्षा की तैयारी की। वह घर पर रोजाना लगभग 10 से 15 घंटे तक पढ़ाई करती थीं। उन्होंने अपनी तैयारी में सेल्फ स्टडी पर खास जोर दिया और सीमित समय में ज्यादा से ज्यादा सिलेबस कवर करने की रणनीति अपनाई।
उनकी मेहनत का नतीजा यह रहा कि उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली और ऑल इंडिया रैंक 9 हासिल की। इस सफलता ने उन्हें देशभर में पहचान दिलाई।
बीमारी में भी नहीं छोड़ी पढ़ाई
सौम्या का UPSC सफर सिर्फ कम समय में तैयारी करने तक सीमित नहीं था। मुख्य परीक्षा के दौरान उनकी तबीयत भी काफी खराब थी। एक दिन उनकी हालत इतनी खराब हो गई कि उन्हें दिन में तीन बार सलाइन चढ़ानी पड़ी। इसके बावजूद उन्होंने अपनी तैयारी और परीक्षा को बीच में नहीं छोड़ा।
सफलता का राज
सौम्या का मानना है कि UPSC की तैयारी में सबसे महत्वपूर्ण चीज निरंतर मेहनत और सेल्फ स्टडी है। उनके अनुसार, अगर किसी उम्मीदवार को खुद पढ़ाई करके परीक्षा पास करने का भरोसा है तो उसके लिए कोचिंग अनिवार्य नहीं है। हालांकि, जिन उम्मीदवारों को सही दिशा और मार्गदर्शन की जरूरत महसूस होती है, वे कोचिंग की मदद ले सकते हैं।
उनका कहना है कि कोचिंग लेने के बाद भी सेल्फ स्टडी बेहद जरूरी है। अगर उम्मीदवार सही टाइम टेबल बनाकर नियमित रूप से मेहनत करे और अपनी तैयारी पर लगातार फोकस बनाए रखे, तो सफलता हासिल की जा सकती है। सौम्या शर्मा की कहानी इसी दृढ़ संकल्प और मेहनत की मिसाल है।
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