राज्य में करीब नौ साल से जेटेट का आयोजन नहीं हुआ है। इसपर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 31 मार्च 2026 तक जेटेट आयोजित करने का निर्देश दिया था।
9 साल से जेटेट का आयोजन नहीं
राज्य में करीब नौ साल से जेटेट का आयोजन नहीं हुआ है। इसपर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 31 मार्च 2026 तक जेटेट आयोजित करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने सहायक आचार्य नियुक्ति के शेष रिक्त पदों पर नियुक्ति पर भी रोक लगाई थी। तब कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि जबतक जेटेट नहीं ले लिया जाता, तबतक राज्य सरकार शिक्षक नियुक्ति के लिए नया विज्ञापन जारी न करे।
झारखंड में छात्रों का प्रदर्शन जारी
झारखंड में हजारों छात्र-छात्राएं बीते कई दिनों से आंदोलन और भूख हड़ताल कर रहे हैं। छात्रों की मांग किसी एक परीक्षा को रद्द कराने या किसी अधिकारी का इस्तीफा लेने की नहीं है, बल्कि वे सरकारी नौकरियों की नियुक्ति प्रक्रिया को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की मांग कर रहे हैं। राजधानी रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम से लेकर अल्बर्ट एक्का चौक तक छात्र अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं के नोटिफिकेशन जारी होने के बाद सालों तक लंबित रहने, पेपर लीक और कथित धांधली जैसी घटनाओं से वे परेशान हैं। इसी वजह से उनका आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है।
JPSC की 14वीं PT परीक्षा से बढ़ा विवाद
JPSC की ओर से 19 अप्रैल को आयोजित की गई 14वीं प्रारंभिक परीक्षा (PT) में कथित धांधली और OMR शीट में गड़बड़ी के आरोप सामने आने के बाद छात्रों की नाराजगी बढ़ गई। परीक्षा का रिजल्ट जारी होने के बाद मेरिट लिस्ट तैयार करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठे।
इसी दौरान सोशल मीडिया पर एक OMR शीट की कार्बन कॉपी वायरल हुई। दावा किया गया कि एक परीक्षार्थी ने पेपर-1 में 100 में से केवल 48 सवाल हल किए थे, फिर भी उसे सफल घोषित कर दिया गया। मामला बढ़ने के बाद राज्य सरकार ने CID जांच की घोषणा की। इसके बाद आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने इस्तीफा दे दिया। विवाद बढ़ने पर JPSC ने संयुक्त सिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा समेत नौ अन्य भर्ती परीक्षाओं को रद्द कर दिया।
JSSC की परीक्षाएं भी विवादों में
JPSC के अलावा JSSC की भर्ती परीक्षाओं को लेकर भी अभ्यर्थी सवाल उठाते रहे हैं। JSSC-CGL परीक्षा में पेपर लीक और कई तरह की अनियमितताओं के आरोप लगे थे। वहीं, 2026 की फील्ड वर्कर भर्ती परीक्षा को लेकर भी अभ्यर्थियों ने कई शिकायतें दर्ज कराई हैं।
छात्रों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं के बार-बार रद्द होने या टलने से उनके सामने सबसे बड़ी समस्या उम्र सीमा खत्म होने की है। कई अभ्यर्थी वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन भर्ती प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो पा रही है।
‘कब तक इंतजार करेंगे?’
अल्बर्ट एक्का चौक पर प्रदर्शन कर रहे JSSC-CGL अभ्यर्थी प्रदीप तिर्की कहते हैं, “कब तक इंतजार करेंगे? दस परीक्षाएं दीं, सात में सफल रहे, लेकिन आज भी बेरोजगार हैं।” उनका कहना है कि राज्य में भर्ती परीक्षाओं का कोई निश्चित वार्षिक कैलेंडर नहीं है, जिसके अनुसार समय पर नियुक्तियां पूरी हो सकें। उन्होंने स्थानीय नियोजन नीति को लेकर भी सवाल उठाए।
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