विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि छात्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह निर्णय लिया गया है जबकि लापरवाही बरतने वाले संस्थानों के खिलाफ अलग से कार्रवाई भी की जाएगी।
कब आयोजित हुई थी परीक्षाएं
विश्वविद्यालय की सम सेमेस्टर परीक्षाएं 7 मई से 11 जून तक आयोजित हुई थीं। नियमानुसार जून माह में ही प्रैक्टिकल परीक्षाएं संपन्न कराकर उनके अंक ऑनलाइन अपलोड किए जाने थे। हालांकि कई कॉलेजों ने निर्धारित समय में प्रैक्टिकल अंक अपलोड नहीं किए। इसके बाद विश्वविद्यालय ने ऐसे संस्थानों को गठित समिति के समक्ष तलब कर प्रैक्टिकल से जुड़े सभी अभिलेख प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। जांच के दौरान प्रदेश के 30 से अधिक कॉलेज प्रैक्टिकल से संबंधित जियो टैग्ड फोटो, प्रोजेक्ट अभिलेख, प्रैक्टिकल उत्तर पुस्तिकाएं तथा अन्य जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। बता दें कि सबसे अधिक मामले बीफार्मा कॉलेजों से जुड़े पाए गए।
परीक्षा प्रक्रिया, पारदर्शिता से समझौता संभव नहीं
एकेटीयू के परीक्षा नियंत्रक प्रो. दीपक नगरिया ने कहा कि विश्वविद्यालय परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं करेगा। जिन कॉलेजों ने प्रैक्टिकल से जुड़े आवश्यक अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए हैं, वहां छात्रहित में दोबारा प्रैक्टिकल कराने का निर्णय लिया गया है। दोबारा परीक्षा की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित कॉलेजों की जवाबदेही तय करते नियमानुसार कार्रवाई होगी।
फेसलेस स्टूडेंट सिस्टम
एकेटीयू ने छात्रों की समस्याओं के त्वरित और पारदर्शी समाधान के लिए नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर ली है। विश्वविद्यालय ने इसे फेसलेस स्टूडेंट सिस्टम नाम दिया है। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद छात्रों को अपनी शिकायत या समस्या के समाधान के लिए विश्वविद्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। वे घर बैठे ऑनलाइन समस्या दर्ज करा सकेंगे और उसी माध्यम से उसका समाधान भी प्राप्त कर सकेंगे। फेसलेस स्टूडेंट सिस्टम से प्रदेभ के पांच लाख से अधिक छात्र-छात्राओं की समस्याओं का निदान ऑनलाइन माध्यम से तय समय में किया जाएगा। एक सितम्बर से एकेटीयू के फेसलेस स्टूडेंट सिस्टम को लागू करने की योजना है।
छोटे से भी काम के लिए नहीं काटने होंगे कॉलेज के चक्कर
एकेटीयू की उप परीक्षा नियंत्रक नेहा श्रीवास्तव ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य छात्रों को अनावश्यक भागदौड़ से राहत देना और शिकायत निस्तारण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध बनाना है। अब प्रदेश के विभिन्न जिलों और दूरदराज के क्षेत्रों में पढ़ने वाले छात्रों को किसी छोटे से काम के लिए भी लखनऊ स्थित विश्वविद्यालय मुख्यालय आने की आवश्यकता नहीं होगी। फेसलेस स्टूडेंट सिस्टम के तहत छात्र विश्वविद्यालय के निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज करेंगे। शिकायत दर्ज होते ही उसे संबंधित विभाग या अनुभाग को भेज दिया जाएगा। संबंधित अधिकारी निर्धारित समय सीमा के भीतर शिकायत का निस्तारण करेंगे।
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