ऐसा इसलिए होता है क्योंकि किसी से दूरी बनाना और उससे भावनात्मक रूप से अलग होना एक ही बात नहीं है। आप उससे बात करना बंद कर सकते हैं, लेकिन आपके दिमाग में बनी उसकी जगह इतनी आसानी से खत्म नहीं होती।
असल में आप उसे नहीं, उसके एक रूप को याद कर रहे होते हैं
कई बार ब्रेकअप के बाद हमें असली इंसान से ज्यादा उसका वो रूप याद आता है, जिसे हमने अपने दिमाग में बना रखा है। अच्छे पल बार-बार याद आते हैं। उसकी बातें, साथ बिताया समय और वो भविष्य जो हमने उसके साथ सोचा था। वहीं, वो बातें पीछे छूट जाती हैं जिनसे हमें दुख हुआ था। इसलिए आगे बढ़ने के लिए सिर्फ उससे दूर रहना नहीं, बल्कि अपने दिमाग में बने उसके उस आदर्श रूप को भी समझना जरूरी है।
पहला कदम: रिश्ते की पूरी सच्चाई लिखिए
सिर्फ अच्छी यादों को याद करने के बजाय रिश्ते की पूरी तस्वीर सामने रखिए। उसने कब आपको दुख पहुंचाया? कौन से वादे पूरे नहीं किए? कब आपको छोटा महसूस हुआ? किन बातों को आपने प्यार के नाम पर नजरअंदाज किया? इन बातों को लिखकर रखिए। जब रात में उसकी याद बहुत ज्यादा आए, तो उस लिस्ट को पढ़िए। इससे आपको याद रहेगा कि आप सिर्फ एक अच्छे पल को नहीं, बल्कि पूरी कहानी को पीछे छोड़कर आगे बढ़ रहे हैं।
दूसरा कदम: मैसेज करने की इच्छा को 20 मिनट दीजिए
जब उसका मैसेज करने का मन करे, तो खुद से यह मत कहिए कि “मैं कभी मैसेज नहीं करूंगी।” बस कहिए- अभी नहीं, 20 मिनट बाद। टाइमर लगाइए और इस दौरान कुछ और कीजिए। टहलें, संगीत सुनें या किसी दोस्त से बात करें। कई बार मैसेज करने की इच्छा एक लहर की तरह आती है। कुछ देर बहुत तेज होती है और फिर खुद कम हो जाती है। हर बार उस इच्छा पर तुरंत काम करना जरूरी नहीं है।
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तीसरा कदम: सिर्फ इंसान नहीं, उस भविष्य को भी छोड़िए
ब्रेकअप में हम सिर्फ एक व्यक्ति को नहीं खोते। हम उस जिंदगी को भी खोते हैं जिसकी कल्पना हमने उसके साथ की थी। शादी, घर, परिवार या साथ बिताए जाने वाले सालों के सपने- इन सबका टूटना भी दुख देता है। इसलिए खुद से पूछिए, “मुझे उसकी याद आ रही है या उस जिंदगी की, जो मैंने उसके साथ सोची थी?” इस फर्क को समझना आगे बढ़ने में बहुत मदद कर सकता है।
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चौथा कदम: अपनी जिंदगी को फिर से भरना शुरू कीजिए
ठीक महसूस होने का इंतजार मत कीजिए। पहले अपनी जिंदगी में बदलाव शुरू कीजिए। नई दिनचर्या बनाइए। जिम जाएं, दोस्तों से मिलें, कोई पुराना शौक शुरू करें या कुछ नया सीखें। शुरुआत में मन नहीं करेगा, लेकिन धीरे-धीरे आपका दिमाग यह सीखने लगेगा कि सुकून और खुशी सिर्फ उसी इंसान से जुड़ी हुई नहीं है। आप उससे अलग होकर अपनी जिंदगी दोबारा नहीं बनाते। कई बार अपनी जिंदगी दोबारा बनाते-बनाते ही उससे अलग होना शुरू करते हैं।
फिर एक दिन सब शांत हो जाता है
भावनात्मक अलगाव किसी बड़े पल की तरह नहीं आता। एक दिन आपको एहसास होगा कि पूरा दिन निकल गया और आपने उसके बारे में सोचा ही नहीं। फिर उसका नाम सुनेंगे और दिल पहले जैसा नहीं धड़केगा। आप उसे भूलने का नाटक नहीं कर रहे होंगे। आपको सच में फर्क पड़ना कम हो जाएगा। यही आगे बढ़ना है। उसे मिटाना नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी में खुद को इतना बड़ा बना लेना कि उसकी कमी आपकी पूरी दुनिया न रह जाए।
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