यदि शरीर पर अचानक लाल चकत्ते लगातार बढ़ रहे हों, फैल रहे हों या बार-बार हो रहे हों तो स्वयं उपचार करने के बजाय चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए. इसे साधारण एलर्जी ना समझे, यह लापरवाही आगे चलकर गंभीर समस्या का रूप ले सकती है. डॉ रास बिहारी तिवारी का कहना है कि समय पर पहचान, संतुलित आहार और नियमित दिनचर्या अपनाने से अधिकतर त्वचा समस्याओं को नियंत्रित किया जा सकता है.
डॉ तिवारी बताते हैं कि लाल चकत्ते की समस्या में सबसे पहले खानपान पर नियंत्रण बेहद जरूरी है. अधिक मसालेदार, तला-भुना, जंक फूड और अधिक खट्टे पदार्थों से परहेज करना चाहिए. आयुर्वेद में नीम को रक्तशोधक माना गया है. सुबह खाली पेट नीम की कोमल पत्तियां चबाना या नीम की पत्तियों को उबालकर उसका पानी पीना लाभकारी हो सकता है. इसके अलावा गिलोय का रस और आंवला का सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और त्वचा रोगों में राहत देता है. प्रभावित स्थान पर ताजा एलोवेरा जेल लगाने से ठंडक मिलती है और खुजली कम होती है. हल्दी और चंदन का लेप भी त्वचा की सूजन और लालिमा कम करने में सहायक माना जाता है. पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और शरीर को हाइड्रेट रखना भी जरूरी है, क्योंकि शरीर में पानी की कमी से त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं.
बढ़ने लगे मुश्किल तो लें चिकित्सक की मदद
डॉ रास बिहारी तिवारी बताते हैं कि कि यदि लाल चकत्ते लगातार बढ़ रहे हों, फैल रहे हों या बार-बार हो रहे हों तो स्वयं उपचार करने के बजाय चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए. कई बार यह एक्जिमा, सोरायसिस या अन्य गंभीर त्वचा रोगों का संकेत भी हो सकता है. आयुर्वेद में पंचकर्म, रक्तशोधन और जीवन शैली सुधार को दीर्घकालिक उपचार का हिस्सा माना गया है. डॉ रास बिहारी तिवारी का कहना है कि समय पर पहचान, संतुलित आहार और नियमित दिनचर्या अपनाने से अधिकतर त्वचा समस्याओं को नियंत्रित किया जा सकता है.
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