खुदीराम बोस भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सबसे युवा और महान क्रांतिकारियों में से एक थे। मात्र 18 वर्ष की उम्र में देश की आजादी के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर झूलने वाले इस वीर सपूत का नाम भारतीय इतिहास में अमर है। उनका जन्म 3 दिसंबर 1889 को पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर जिले के हबीबपुर गांव में हुआ था। बचपन में ही माता-पिता का साया उठ जाने के कारण उनका पालन-पोषण उनकी बड़ी बहन ने किया। किशोरावस्था से ही उनके मन में देश को आजाद कराने की तीव्र भावना थी। वे ‘अनुशीलन समिति’ और ‘युगांतर’ जैसी क्रांतिकारी संस्थाओं से जुड़ गए थे। वे नौवीं कक्षा में ही पढ़ाई छोड़कर स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े। ब्रिटिश हुकूमत का एक बहुत ही क्रूर और सख्त मजिस्ट्रेट था डी. एच. किंग्सफोर्ड, जो भारतीय क्रांतिकारियों को कठोर सजाएं देता था। क्रांतिकारी समूह ने उसे मारने की योजना बनाई और यह जिम्मेदारी खुदीराम बोस और उनके साथी प्रफुल्ल चाकी को सौंपी गई।
30 अप्रैल 1908 की रात मुजफ्फरपुर (बिहार) में उन्होंने किंग्सफोर्ड की बग्गी समझकर उस पर बम फेंक दिया। हालांकि, उस बग्गी में किंग्सफोर्ड नहीं था, बल्कि दो अंग्रेज महिलाएं सवार थीं, जिनकी इस हमले में मौत हो गई। इस घटना के बाद प्रफुल्ल चाकी ने अंग्रेजों के हाथ आने से बचने के लिए खुद को गोली मार ली। वहीं खुदीराम बोस को रेलवे स्टेशन के पास से गिरफ्तार कर लिया गया। उनकी यही क्रांतिकारी जोश युवाओं में कुछ कर गुजरने का जज्बा पैदा करते हैं। यहां उनके मोटिवेशनल कोट्स दिए गए हैं जो आपके अंदर देश प्रेम जगा देंगे।
1. ड़ो, लड़ नहीं सकते,
बोलो, बोल नहीं सकते,
लिखो, लिख नहीं सकते,
साथ दो साथ नहीं दे सकते,
काम करने वालो का मनोबल बढ़ाओ यदि वो भी नहीं कर सकते हो,
जो कर रहे हैं, उनका मनोबल मत तोड़ों क्योंकि वो तुम्हारे हिस्से की लड़ाई लड़ रहा है।
2. देशभक्ति कोई ऐसी वस्तु नहीं जिसे बाजार से खरीदा जा सके, यह तो हर नागरिक की रगों में बहने वाले खून में होनी चाहिए।
3. गुलामी की जंजीरों में जकड़े रहकर जीने से कहीं बेहतर है कि देश की आजादी के लिए लड़ते हुए हंसते-हंसते अपनी जान दे दी जाए।
4. अगर देश को स्वतंत्र कराने के लिए मेरी बलि चढ़ना जरूरी है, तो मैं एक बार नहीं, बार-बार फांसी के फंदे पर झूलने को तैयार हूं।
5. मातृभूमि की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है, और इसके लिए दिया गया बलिदान ही जीवन की सबसे बड़ी सार्थकता है।
6. अत्याचार और अन्याय के सामने सिर झुकाना कायरता है, उसका सीना तानकर मुकाबला करना ही असली युवा शक्ति का प्रमाण है।
7. मौत से क्या डरना? मौत तो एक दिन आनी ही है, लेकिन जो देश के काम आ जाए, वही जीवन अमर हो जाता है।
8. जब तक हमारे देश के युवा अपने आराम और स्वार्थ का त्याग नहीं करेंगे, तब तक कोई भी क्रांति सफल नहीं हो सकती।
9. मातृभूमि के चरणों में समर्पित किया गया हर एक विचार और कदम राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखता है।
10. क्रांति की आग केवल हथियारों से नहीं, बल्कि दिल में जल रही देशभक्ति की अटूट ज्वाला से फैलती है।
11. मेरी फांसी युवाओं के लिए अंत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता के उस महासंग्राम की शुरुआत होगी जो अंग्रेजों को भारत से उखाड़ फेंकेगी।
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