जन्म और परिवार
पश्चिम बंगाल के कोलकाता में 08 जुलाई 1972 को सौरव गांगुली का जन्म हुआ था। उनके पिता का नाम चंडीदास गांगुली और मां का नाम निरूपा गांगुली था। इन्होंने अपनी शुरूआती शिक्षा सेंट जेवियर्स कोलेजिएट स्कूल से पूरी की थी।
क्रिकेट करियर
साल 1996 में सौरव गांगुली ने इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स टेस्ट से इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू किया था। उन्होंने पहली पारी में 131 रन बनाकर इतिहास रच किया था। फिर गांगुली ने ट्रेंट ब्रिज टेस्ट में शतक जड़कर यह साबित कर दिया कि वह लंबे समय तक भारतीय क्रिकेट की पहचान बनाने वाले हैं।
साल 2000 में मैच फिक्सिंग विवाद के बाद इंडियन क्रिकेट मुश्किल समय से गुजर रहा था। ऐसे मुश्किल समय में गांगुली ने कप्तानी संभाली और भारतीय टीम में नई जान फूंक दी। गांगुली ने न सिर्फ खिलाड़ियों को मैच खेलना सिखाया बल्कि हर हाल में जीत के लिए लड़ना भी सिखाया।
सौरव गांगुली ने भारतीय टीम में कई ऐसे खिलाड़ियों को मौका दिया, जो आगे जाकर भारतीय क्रिकेट के सुपरस्टार बने। गांगुली ने युवराज सिंह, एम एस धोनी, हरभजन सिंह, वीरेंद्र सहवाग, आशीष नेहरा और जहीर खान जैसे खिलाड़ियों पर भरोजा जताया। जो आगे जाकर भारतीय क्रिकेट के लिए वरदान साबित हुए।
सौरव गांगुली की कप्तानी में भारत ने साल 2003 के वर्ल्ड कप फाइनल तक का सफर तय किया। लेकिन इस दौरान भारतीय टीम खिताब नहीं जीत सकी। लेकिन इस टूर्नामेंट ने भारत को विश्व क्रिकेट की सबसे मजबूत टीम में शामिल कर दिया।
सम्मान
साल 1997 में सौरव गांगुली को खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए भारत सरकार के प्रतिष्ठित ‘अर्जुन पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।
साल 2004 में भारत सरकार द्वारा सौरव गांगुली को ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया गया।
फिर साल 2013 में पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा सौरव गांगुली को राज्य के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘बंग विभूषण’ से सम्मानित किया गया।
BCCI अध्यक्ष
क्रिकेट के संन्यास लेने के बाद साल 2019-22 में गांगुली भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष भी रहे। भारतीय क्रिकेट ने उनके कार्यकाल में कई बड़े फैसले लिए। उन्होंने घरेलू क्रिकेट के विकास पर खास ध्यान दिया। उन्होंने भारतीय टीम को सिर्फ जीतना नहीं बल्कि दुनिया की आंखों में आंखें डालकर खेलना सिखाया।
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