भारतीय क्रिकेट टीम इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में मिली हार के बाद भारत लगातार तीसरा पूरा हुआ टी20 मुकाबला हार चुका हैं। इससे पहले टीम को आयरलैंड के खिलाफ भी हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे में अब भारतीय टीम पर श्रृंखला बचाने का दबाव बढ़ गया है।
भारत दो बार लगातार टी20 विश्व कप जीत चुका हैं, लेकिन कप्तान के रूप में टीम को खिताब दिलाने वाले सूर्यकुमार यादव खराब बल्लेबाजी के कारण अपनी कप्तानी और टीम में जगह दोनों गंवा चुके हैं। दूसरी ओर आईपीएल में शानदार प्रदर्शन करने वाले युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को मैनचेस्टर में अंतरराष्ट्रीय पदार्पण का मौका मिला।
गौरतलब है कि भारत ने आखिरी बार लगातार तीन या उससे अधिक टी20 मुकाबले वर्ष 2021 में गंवाए थे। उस दौरान टीम श्रीलंका के खिलाफ दो मुकाबले हारने के बाद टी20 विश्व कप में पाकिस्तान और न्यूजीलैंड से भी पराजित हुई थी। अब एक बार फिर वैसी ही स्थिति बनती दिखाई दे रही हैं।
मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर दूसरे टी20 में भारतीय बल्लेबाजी की सबसे बड़ी कमजोरी मध्यक्रम साबित हुआ। इंग्लैंड के ऑलराउंडर सैम करन ने अपनी सटीक गेंदबाजी से भारतीय बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। शिवम दुबे को तिलक वर्मा से पहले बल्लेबाजी के लिए भेजा गया, लेकिन वह सात गेंदों में संघर्ष करते नजर आए और टीम की रन गति पर असर पड़ा।
आंकड़ों पर नजर डालें तो दोनों मुकाबलों में भारत की शुरुआत अच्छी रही, लेकिन मध्य ओवरों में रन बनाने की रफ्तार अचानक धीमी पड़ गई। पहले टी20 में आठ ओवर तक भारत 87 रन पर दो विकेट खो चुका था, लेकिन अगले छह ओवर में केवल 38 रन ही जोड़ सका। इंग्लैंड के कप्तान हैरी ब्रूक ने इस दौरान लगातार अलग-अलग गेंदबाजों का इस्तेमाल किया।
दूसरे टी20 में भी लगभग यही कहानी दोहराई गई। भारत 13 ओवर तक दो विकेट पर 130 रन बना चुका था, लेकिन श्रेयस अय्यर के आउट होने के बाद अगले 35 गेंदों में केवल 36 रन बने और तीन विकेट भी गिर गए। इससे टीम बड़ा स्कोर खड़ा करने का मौका गंवा बैठी है।
जानकारों का मानना है कि भारतीय बल्लेबाजों में मैच की स्थिति के अनुसार फैसले लेने की कमी भी दिखाई दी है। पहले मुकाबले में शिवम दुबे अच्छी लय में होने के बावजूद अंतिम ओवर में स्ट्राइक अपने पास नहीं रख सके। वहीं मैनचेस्टर में तिलक वर्मा ने आखिरी ओवर की शुरुआती तीन गेंदों पर 16 रन बनाने के बाद भी स्ट्राइक छोड़ दी, जिससे टीम को अपेक्षित फायदा नहीं मिल सका।
दूसरी ओर इंग्लैंड के लिए यह जीत काफी राहत लेकर आई हैं। लॉर्ड्स टेस्ट के बाद टीम लगातार आलोचनाओं का सामना कर रही थी। अब इस जीत से इंग्लैंड को आत्मविश्वास मिला हैं और टीम प्रबंधन को भविष्य की योजनाओं पर काम करने का समय भी मिला।
अब भारतीय टीम की नजर ट्रेंट ब्रिज में होने वाले अगले टी20 मुकाबले पर टिकी हुई हैं। यदि भारत को श्रृंखला में वापसी करनी हैं तो मध्यक्रम को जिम्मेदारी निभानी होगी और बल्लेबाजों को दबाव के क्षणों में बेहतर फैसले लेने होंगे। तभी टीम लगातार हार के सिलसिले को रोककर जीत की राह पर लौट सकेगी।
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