क्या है नया नियम?
उपभोक्ता मामलों के विभाग ने कानूनी माप विज्ञान नियमों में बदलाव किया है. नए नियम के मुताबिक खाद्य तेल कंपनियां अब मनमाने पैक साइज में तेल नहीं बेच सकेंगी. उन्हें सरकार द्वारा तय किए गए पैकेजिंग साइज का ही पालन करना होगा. यह नियम भारत में बनने वाले और विदेशों से आयात किए जाने वाले दोनों तरह के खाद्य तेलों पर लागू होगा.
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किन साइज में मिलेगा तेल?
सरकार ने कुल 9 मानक पैक साइज तय किए हैं. अब खाने का तेल मुख्य रूप से इन पैक में मिलेगा-
- 200 मिलीलीटर
- 500 मिलीलीटर
- 1 लीटर
- 2 लीटर
- 3 लीटर
- 4 लीटर
- 5 लीटर
- 15 लीटर
- 20 लीटर
किन तेलों पर लागू होगा नियम?
यह नियम देश में इस्तेमाल होने वाले लगभग सभी मुख्य तेल पर लागू होगा. इनमें शामिल हैं-
- पाम ऑयल
- सोयाबीन ऑयल
- सनफ्लावर ऑयल
- सरसों का तेल
- मूंगफली का तेल
- तिल का तेल
- राइस ब्रान ऑयल
- कॉटनसीड ऑयल
- मक्का ऑयल
पैकेट पर वजन बताना भी जरूरी
सरकार ने एक और महत्वपूर्ण बदलाव किया है. अब कंपनियों को तेल की मात्रा के साथ उसका वजन भी बताना होगा. उदाहरण के लिए, अगर पैक पर 1 लीटर तेल लिखा है तो उसके बराबर का वजन (किलोग्राम में) भी पैकेट पर दर्ज करना होगा. इससे ग्राहकों को उत्पाद की सही जानकारी मिल सकेगी.
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किन्हें मिली छूट?
सरकार ने 200 मिलीलीटर से छोटे पैक और कुछ विशेष श्रेणी के छोटे खाद्य तेल उत्पादों को इस नियम से बाहर रखा है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कम कीमत वाले छोटे पैक बाजार में उपलब्ध रहें और कम आय वाले उपभोक्ताओं को परेशानी न हो.
कंपनियों को मिला 3 महीने का समय
नए नियमों को लागू करने के लिए निर्माताओं, पैकर्स और आयातकों को 3 महीने का समय दिया गया है. इस दौरान कंपनियां अपनी पैकेजिंग और लेबलिंग में जरूरी बदलाव कर सकेंगी. हालांकि, जो कंपनियां चाहें, वे इन नियमों को पहले भी लागू कर सकती हैं.
ग्राहकों को क्या फायदा होगा?
सरकार का मानना है कि एक जैसे पैक साइज होने से ग्राहकों को अलग-अलग ब्रांड के तेल की कीमतों की तुलना करना आसान होगा. इससे खरीदारी के समय भ्रम कम होगा और उपभोक्ता बेहतर फैसला ले सकेंगे.
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