आम ग्राहकों के बीच EV के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए एक्स-फैक्ट्री की कीमत 1.5 लाख रुपए तक की कीमत वाली बाइक सब्सिडी के लिए योग्य हैं। ये सब्सिडी शुरू में सरकार की ‘इलेक्ट्रिक मोबिलिटी प्रमोशन स्कीम 2024’ (EMPS 2024) के तहत शुरू की गई थी।
कुल मिलाकर 45,79,120 यूनिट्स पर सब्सिडी दी जाएगी। अगर बजट खत्म हो जाता है या तय तारीख से पहले ही यह संख्या पूरी हो जाती है, तो स्कीम बंद हो जाएगी। इस स्कीम के तहत फायदे के लिए मंत्रालय में कोई भी दावा जमा करने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर, 2027 होगी। इनमें से कुछ बदलावों का ऐलान सबसे पहले पिछले साल अगस्त में किया गया था।
फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में नई खरीदी गई इलेक्ट्रिक बाइक और स्कूटर पर ज्यादा से ज्यादा 10,000 रुपए प्रति यूनिट या ₹5,000 प्रति kWh या गाड़ी की एक्स-फैक्ट्री कीमत का 15%, इनमें से जो भी कम हो उसका फायदा मिल सकता था। फाइनेंशियल 2025-26 से यह लिमिट 5,000 रुपए प्रति यूनिट या 2,500 रुपए प्रति kWh तय कर दी गई है। साथ ही, कीमत का 15% वाला नियम भी लागू रहेगा। मंत्रालय ने कहा है कि इन इंसेंटिव की रकम की समय-समय पर समीक्षा की जाएगी।
आम ग्राहकों के बीच EV के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए एक्स-फैक्ट्री की कीमत 1.5 लाख रुपए तक की कीमत वाली बाइक सब्सिडी के लिए योग्य हैं। ये सब्सिडी शुरू में सरकार की ‘इलेक्ट्रिक मोबिलिटी प्रमोशन स्कीम 2024’ (EMPS 2024) के तहत शुरू की गई थी, जिसे बाद में ज्यादा बड़ी ‘PM E-Drive स्कीम’ में मिला दिया गया। दिलचस्प बात यह है कि मंत्रालय ने साफ किया है कि इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर के लिए इंसेंटिव बढ़ाने का कोई ऑफर नहीं दिया जा रहा है, क्योंकि दिसंबर 2025 में ही यूनिट बिक्री का टारगेट पूरा हो गया था।
पेट्रोल व्हीकल पर क्या असर?
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स (2Ws) को अपनाने से भारत की पेट्रोल पर निर्भरता कम हो सकती है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के डेटा के अनुसार, FY26 में भारत में बिकने वाले 42.6 मिलियन टन पेट्रोल का दो-तिहाई हिस्सा टू-व्हीलर्स में इस्तेमाल होता है। यह कदम इंडस्ट्री बॉडी ‘सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स’ की उस मांग के बाद उठाया गया है जिसमें PM E-Drive स्कीम (जो मूल रूप से दो साल के लिए थी और FY26 में खत्म होने वाली थी) के तहत मिलने वाले इंसेंटिव्स को जारी रखने की बात कही गई थी। इसके बाद सरकार ने बजट आवंटन बढ़ाए बिना क्लेम करने की समय-सीमा को जुलाई 2026 तक बढ़ा दिया।
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