धीरज जाधव ने घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया था, लेकिन एक भी मौका ना मिलने के कारण गुमनामी में खो गए। सचिन तेंदुलकर का रिप्लेसमेंट भी बने, लेकिन गौतम गंभीर के स्थापित हो जाने के बाद प्लेइंग XI में स्थान नहीं बना पाए। पढ़िए उनकी पूरी कहानी।
एक घरेलू सीजन में बना दिए 1245 रन
हम बात कर रहे हैं धीरज जाधव की। साल 2003-4 की बात है। घरेलू क्रिकेट में जाधव ने गजब का दमदार प्रदर्शन किया। इस सत्र में भारतीय घरेलू क्रिकेट से राष्ट्रीय टीम के लिए कई दावेदार सामने आए, लेकिन बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज जाधव ने लगभग सभी को पीछे छोड़ दिया। रणजी और दिलीप ट्रॉफी में उन्होंने मात्र 15 पारियों में 103.75 के असाधारण औसत से 1,245 रन बनाए। इनमें पांच शतक शामिल थे, जिनमें से तीन दोहरे शतक थे। दूसरे सबसे अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज ऋषिकेश कानिटकर थे, जिन्होंने 935 रन बनाए। भारतीय टीम में जगह बनाने की कोशिश कर रहे एक अन्य बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर ने 877 रनों के साथ सत्र समाप्त किया था।
ट्राई सीरीज में मिली जगह, बल्ले से काटा गदर
कुछ महीनों बाद ये आंकड़े जाधव के साथ केन्या के इंडिया ए दौरे पर साथ गए। यह ट्राई सीरीज एमएस धोनी के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उदय के लिए प्रसिद्ध हुई। महाराष्ट्र के सलामी बल्लेबाज ने त्रिकोणीय एकदिवसीय टूर्नामेंट में 257 रन बनाए और पाकिस्तान ए के खिलाफ फाइनल में अपनी सबसे महत्वपूर्ण पारी खेली। गंभीर 12 रन और धोनी 15 रन बनाकर आउट हो गए, लेकिन जाधव द्वारा 112 गेंदों पर खेली गई 89 रनों की पारी ने लक्ष्य का पीछा करते हुए टीम को संभाला। उन्हें इस बेहतरीन प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ द मैच का पुरस्कार मिला। एकदिवसीय टूर्नामेंट समाप्त होने के बाद उन्होंने और भी शानदार प्रदर्शन किया। केन्या के खिलाफ तीन दिवसीय मैच में 260 रन बनाकर नाबाद रहे। इंडिया ए ने 492 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया।
सीनियर इंडिया टीम के खिलाफ भी ठोका शतक
घर लौटने के तुरंत बाद ही उन्हें एक और मौका मिला। ऑस्ट्रेलिया के 2004 के टेस्ट दौरे से पहले सीनियर भारतीय टीम और इंडिया ए के बीच तैयारियों के लिहाज से मुकाबला खेला गया। इसमें धीरज जाधव इंडिया ए की टीम से खेल रहे थे। उनके सामने अनिल कुंबले, हरभजन सिंह, जहीर खान और इरफान पठान जैसे गेंदबाजों की चुनौती थी, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने 113 रन बनाए। एक महीने बाद, उन्हें और गंभीर दोनों को मुंबई में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चौथे टेस्ट के लिए भारतीय टीम में बुलाया गया। आकाश चोपड़ा को टीम से बाहर करने के बाद सलामी बल्लेबाज की जगह खाली थी, लेकिन इन दोनों में से केवल एक को ही मौका दिया जाना था।
फिर भी गौतम गंभीर को दी गई तरजीह
घरेलू क्रिकेट में दमदार प्रदर्शन करने वाले धीरज जाधव को मौका नहीं मिला। उनके ऊपर गौतम गंभीर को तरजीह दी गई। गंभीर ने वानखेड़े में अपना टेस्ट डेब्यू किया और आखिरकार भारत के बड़े सलामी बल्लेबाजों में से एक बन गए। जाधव बेंच पर ही बैठे रहे। एक साल से भी कम समय बाद सचिन तेंदुलकर के स्थान पर टेस्ट सीरीज के लिए भारतीय टीम में दोबारा बुलाए जाने के बावजूद भी उन्हें अंतरराष्ट्रीय डेब्यू का मौका नहीं मिला।
2005 में एक और मौका, लेकिन फिर गंभीर के कारण नहीं खेले
अगस्त 2005 में फिर से उम्मीद की किरण जगी। तेंदुलकर अपनी एल्बो की सर्जरी से उबर रहे थे। भारत को जिम्बाब्वे में दो टेस्ट मैच खेलने थे। तेंदुलकर ने चोट के चलते इस टेस्ट सीरीज से नाम वापस ले लिया। चयनकर्ताओं ने जाधव को उनके स्थान पर टीम में शामिल किया। जाधव के लिए, एक साल से भी कम समय में यह दूसरा मौका था जब उन्हें भारतीय टेस्ट टीम में जगह मिली थी। लेकिन मुंबई में हालात उनसे बेहतर नहीं थे। सहवाग और गंभीर ही सलामी जोड़ी के तौर पर बने रहे, भारत ने दोनों टेस्ट जीते और जाधव को टेस्ट क्रिकेट खेलने का मौका नहीं मिला। जिस खिलाड़ी ने अपने पहले घरेलू सीजन में 103.75 का औसत बनाया था और फिर इंडिया ए के लिए 260 रन नाबाद बनाए थे, वह टेस्ट क्रिकेट के दो बार इतने करीब आकर भी नहीं खेल पाए थे।
ऐसा रहा घरेलू क्रिकेट करियर
जाधव ने अपने करियर में कुल 111 प्रथम श्रेणी मैच खेले, जिसमें 50.85 की औसत से 7,679 रन, 23 शतक और 31 अर्धशतक बनाए। केन्या में बनाया गया उनका नाबाद 260 रन का स्कोर उनका सर्वोच्च स्कोर रहा। लिस्ट ए करियर में उन्होंने 43.22 की औसत से 2,075 रन बनाए, जिनमें पांच शतक शामिल हैं।
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