राष्ट्रीय राजधानी की एक अदालत ने बृहस्पतिवार को निप्पॉन डैनरो इस्पात लिमिटेड (एनडीआईएल) को कोयला ब्लॉक के आवंटन में कथित अनियमितताओं के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दायर ‘क्लोजर रिपोर्ट’ को स्वीकार कर लिया। अदालत ने कहा कि कंपनी या किसी भी लोक सेवक के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी या भ्रष्टाचार का कोई सबूत नहीं मिला। विशेष सीबीआई न्यायाधीश वीरेंद्र कुमार खार्टा कांग्रेस के दो नेताओं -संदीप दीक्षित और मणिकम टैगोर- द्वारा दायर विरोध याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे, जिन्होंने या तो आरोपियों को समन भेजने या इस मामले में आगे की जांच की मांग की थी।
ये याचिकाएं सीबीआई की 23 दिसंबर, 2023 की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ दायर की गई थीं। एजेंसी की रिपोर्ट में कहा गया था कि जांच के बाद, एनडीआईएल सहित किसी भी लोक सेवक या निजी संस्था द्वारा साजिश, धोखाधड़ी और आधिकारिक पदों के दुरुपयोग का कोई अपराध नहीं पाया गया। यह मामला 1993 और 1998 के बीच प्रस्तावित 1,000 मेगावाट की बिजली परियोजना के लिए एनडीआईएल को महाराष्ट्र में लोहारा, बरंज, बांदर और किल्होनी सहित विभिन्न कोयला ब्लॉक के आवंटन से संबंधित था।
सीबीआई की जांच 2012 में छह सांसदों द्वारा केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) में की गई एक शिकायत के आधार पर शुरू की गई थी। न्यायाधीश ने बुधवार को पारित अपने आदेश में कहा, ‘‘इस अदालत को जांच एजेंसी, सीबीआई द्वारा निकाले गए निष्कर्ष से असहमत होने का कोई कारण नहीं दिखता है। प्रथम दृष्टया वर्तमान मामले में कोई अपराध नहीं किया गया है और प्रस्तावित आरोपियों के खिलाफ आगे बढ़ने के लिए रिकॉर्ड पर पर्याप्त सामग्री उपलब्ध नहीं है।’’
उन्होंने आगे कहा, ‘‘तदनुसार, सीबीआई की ओर से दायर इस क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार किया जाता है।
विरोध याचिकाओं को खारिज किया जाता है।
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