नयी दिल्ली, 28 जुलाई कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने मंगलवार को कहा कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में उसका पूंजीगत व्यय 16.64 प्रतिशत बढ़कर 3,399 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 2,914 करोड़ रुपये था। देश की सबसे बड़ी कोयला कंपनी ने एक बयान में कहा कि अप्रैल-जून तिमाही में भूमि अधिग्रहण तथा पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (आरएंडआर) गतिविधियों पर 804 करोड़ रुपये खर्च हुए, जो कुल पूंजीगत व्यय का लगभग एक-चौथाई है। समय पर भूमि अधिग्रहण कोयला खनन के लिए बेहद जरूरी है, क्योंकि इसके बगैर भले ही भंडार उपलब्ध हों, खनन परियोजनाएं शुरू नहीं हो सकतीं न ही उनका विस्तार हो सकता है।
सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी सीआईएल ने कोयला निकासी अवसंरचना को मजबूत करने के लिए सहायक रेल पटरी बिछाने एवं गलियारे के विकास पर 754 करोड़ रुपये निवेश किए। इसके अलावा कोयला साज-संभाल संयंत्र, भंडारण और सड़कों पर 195 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जिससे इस मद में कुल व्यय 949 करोड़ रुपये हो गया। संयंत्र एवं मशीनरी पर 819 करोड़ रुपये खर्च हुए, जिसमें भारी मशीनरी की खरीद और वॉशरी विस्तार शामिल है।
कोल इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन बी. साईराम ने कहा, ‘‘भूमि, अवसंरचना और मशीनरी पर निवेश कुल पूंजीगत व्यय का 75 प्रतिशत से अधिक है और इससे उत्पादन लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी।’’
स्वच्छ ऊर्जा पहल के तहत सौर परियोजनाओं पर 278 करोड़ रुपये और संयुक्त उपक्रमों में 207 करोड़ रुपये निवेश किए गए।
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