भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने शनिवार को प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर आधारित न्यायिक संरचना को गहरा करने और न्याय वितरण में तेजी लाने के लिए तकनीकी प्रगति का उपयोग करने का आह्वान किया। न्यायपालिका के समय की बर्बादी को रोकने के लिए प्रौद्योगिकी को एकमात्र प्रभावी उपाय बताते हुए उन्होंने कहा कि देश की न्यायपालिका आम आदमी के हित में तकनीकी प्रगति और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्य न्यायाधीश मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा आयोजित विखंडन से एकीकरण, एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म एकीकरण के माध्यम से न्याय को सशक्त बनाना विषय पर एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के नव विकसित डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी शुभारंभ किया।
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उन्होंने कहा कि भारतीय न्यायपालिका न केवल 1990 से हमारी प्रणाली का अभिन्न अंग रही तकनीकी प्रगति का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है, बल्कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नवीनतम डिजाइनों और आम आदमी के हित में उनके उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए भी प्रतिबद्ध है। मुख्य न्यायधीश ने आगे कहा कि हमें प्रौद्योगिकी और एआई-आधारित न्यायिक संरचना को मजबूत करने के बारे में सोचना चाहिए। न्यायपालिका के समय की बर्बादी को रोकने का एकमात्र प्रभावी उपाय प्रौद्योगिकी ही है। उन्होंने न्याय वितरण प्रणाली को तेज करने के लिए न्यायपालिका में तकनीकी प्रगति को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा इन प्लेटफार्मों के विकास की सराहना करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जैसा कि केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा था, इन तकनीकी प्रगति को अखिल भारतीय स्तर पर लागू करने की आवश्यकता है।
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उनके अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय ने न्यायिक प्रणाली, विशेष रूप से मामलों के शीघ्र निपटान के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग पर विचार-विमर्श के लिए एक समिति का गठन किया है। इस अवसर पर मंत्री मेघवाल, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संजीव सभरवाल ने भी संबोधित किया।
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